Surah Al-Qiyamah in Hindi

    القيامة

    Surah Al-Qiyamah in Hindi

    Read Surah Al-Qiyamah in Hindi (القيامة) with Arabic text, Hindi translation, and audio recitation. Chapter 75 of the Holy Quran, 40 verses — free online.

    कुरान हिंदी में · all 114 सूरहs

    لَآ أُقۡسِمُ بِيَوۡمِ ٱلۡقِيَٰمَةِ

    मैं क़सम खाता हूँ क़ियामत के दिन[1] की।

    [1] किसी चीज़ की क़सम खाने का अर्थ होता है, उसका निश्चित् होना। अर्थात प्रलय का होना निश्चित् है।

    وَلَآ أُقۡسِمُ بِٱلنَّفۡسِ ٱللَّوَّامَةِ

    तथा मैं क़सम खाता हूँ निंदा[2] करने वाली अंतरात्मा की।

    [2] मनुष्य की अंतरात्मा की यह विशेषता है कि वह बुराई करने पर उसकी निंदा करती है।

    أَيَحۡسَبُ ٱلۡإِنسَٰنُ أَلَّن نَّجۡمَعَ عِظَامَهُۥ

    क्या इनसान समझता है कि हम कभी उसकी हड्डियों को एकत्र नहीं करेंगे?

    بَلَىٰ قَٰدِرِينَ عَلَىٰٓ أَن نُّسَوِّيَ بَنَانَهُۥ

    क्यों नहीं? हम इस बता का भी सामर्थ्य रखते हैं कि उसकी उंगलियों की पोर-पोर सीधी कर दें।

    بَلۡ يُرِيدُ ٱلۡإِنسَٰنُ لِيَفۡجُرَ أَمَامَهُۥ

    बल्कि मनुष्य चाहता है कि अपने आगे भी[3] गुनाह करता रहे।

    [3] अर्थात वह प्रलय तथा ह़िसाब का इनकार इसलिए करता है ताकि वह पूरी आयु कुकर्म करता रहे।

    يَسۡـَٔلُ أَيَّانَ يَوۡمُ ٱلۡقِيَٰمَةِ

    वह पूछता है कि क़ियामत का दिन कब होगा?

    فَإِذَا بَرِقَ ٱلۡبَصَرُ

    तो जब आँख चौंधिया जाएगी।

    وَخَسَفَ ٱلۡقَمَرُ

    और चाँद को ग्रहण लग जाएगा।

    وَجُمِعَ ٱلشَّمۡسُ وَٱلۡقَمَرُ

    और सूर्य और चाँद एकत्र[4] कर दिए जाएँगे।

    [4] अर्थात दोनों पश्चिम से अँधेरे होकर निकलेंगे।

    १०

    يَقُولُ ٱلۡإِنسَٰنُ يَوۡمَئِذٍ أَيۡنَ ٱلۡمَفَرُّ

    उस दिन मनुष्य कहेगा कि भागने का स्थान कहाँ है?

    ११

    كَلَّا لَا وَزَرَ

    कदापि नहीं, शरण लेने का स्थान कोई नहीं।

    १२

    إِلَىٰ رَبِّكَ يَوۡمَئِذٍ ٱلۡمُسۡتَقَرُّ

    उस दिन तेरे पालनहार ही की ओर लौटकर जाना है।

    १३

    يُنَبَّؤُاْ ٱلۡإِنسَٰنُ يَوۡمَئِذِۭ بِمَا قَدَّمَ وَأَخَّرَ

    उस दिन इनसान को बताया जाएगा जो उसने आगे भेजा और जो पीछे छोड़ा।[5]

    [5] अर्थात संसार में जो कर्म किया और जो करना चाहिए था, फिर भी नहीं किया।

    १४

    بَلِ ٱلۡإِنسَٰنُ عَلَىٰ نَفۡسِهِۦ بَصِيرَةٞ

    बल्कि इनसान स्वयं अपने विरुद्ध गवाह[6] है।

    [6] अर्थात वह अपने अपराधों को स्वयं भी जानता है क्योंकि पापी का मन स्वयं अपने पाप की गवाही देता है।

    १५

    وَلَوۡ أَلۡقَىٰ مَعَاذِيرَهُۥ

    अगरचे वह अपने बहाने पेश करे।

    १६

    لَا تُحَرِّكۡ بِهِۦ لِسَانَكَ لِتَعۡجَلَ بِهِۦٓ

    (ऐ नबी!) आप इसके साथ अपनी ज़ुबान न हिलाएँ[7], ताकि इसे शीघ्र याद कर लें।

    [7] ह़दीस में है कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) फ़रिश्ते जिब्रील से वह़्य पूरी होने से पहले इस भय से उसे दुहराने लगते कि कुछ भूल न जाएँ। उसी पर यह आयत उतरी। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4928, 4929) इसी विषय को सूरत ताहा तथा सूरतुल-आला में भी दुहराया गया है।

    १७

    إِنَّ عَلَيۡنَا جَمۡعَهُۥ وَقُرۡءَانَهُۥ

    निःसंदेह उसको एकत्र करना और (आपका) उसे पढ़ना हमारे ज़िम्मे है।

    १८

    فَإِذَا قَرَأۡنَٰهُ فَٱتَّبِعۡ قُرۡءَانَهُۥ

    अतः जब हम उसे पढ़ लें, तो आप उसके पठन का अनुसरण करें।

    १९

    ثُمَّ إِنَّ عَلَيۡنَا بَيَانَهُۥ

    फिर निःसंदेह उसे स्पषट करना हमारे ही ज़िम्मे है।

    २०

    كَلَّا بَلۡ تُحِبُّونَ ٱلۡعَاجِلَةَ

    कदापि नहीं[8], बल्कि तुम शीघ्र प्राप्त होने वाली चीज़ (संसार) से प्रेम करते हो।

    [8] यहाँ से बात फिर काफ़िरों की ओर फिर रही है।

    २१

    وَتَذَرُونَ ٱلۡأٓخِرَةَ

    और बाद में आने वाली (आख़िरत) को छोड़ देते हो।

    २२

    وُجُوهٞ يَوۡمَئِذٖ نَّاضِرَةٌ

    उस दिन कई चेहरे तरो-ताज़ा होंगे।

    २३

    إِلَىٰ رَبِّهَا نَاظِرَةٞ

    अपने पालनहार की ओर देख रहे होंगे।

    २४

    وَوُجُوهٞ يَوۡمَئِذِۭ بَاسِرَةٞ

    और कई चेहरे उस दिन बिगड़े हुए होंगे।

    २५

    تَظُنُّ أَن يُفۡعَلَ بِهَا فَاقِرَةٞ

    उन्हें विश्वास होगा कि उनके साथ कमड़ तोड़ देने वाली सख्ती की जाएगी।

    २६

    كَلَّآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلتَّرَاقِيَ

    कदापि नहीं[9], जब प्राण हँसलियों तक पहुँच जाएगा।

    [9] अर्थात यह विचार सह़ीह़ नहीं कि मौत के पश्चात् सड़-गल जाएँगे और दोबारा जीवित नहीं किए जाएँगे। क्योंकि आत्मा रह जाती है, जो मौत के साथ ही अपने पालनहार की ओर चली जाती है।

    २७

    وَقِيلَ مَنۡۜ رَاقٖ

    और कहा जाएगा : कौन है झाड़-फूँक करने वाला?

    २८

    وَظَنَّ أَنَّهُ ٱلۡفِرَاقُ

    और उसे विश्वास हो जाएगा कि यह (संसार से) जुदाई का समय है।

    २९

    وَٱلۡتَفَّتِ ٱلسَّاقُ بِٱلسَّاقِ

    और पिंडली, पिंडली[10] के साथ लिपट जाएगी।

    [10] अर्थात मौत का समय आ जाएगा जो निरंतर दुःख का समय होगा। (इब्ने कसीर)

    ३०

    إِلَىٰ رَبِّكَ يَوۡمَئِذٍ ٱلۡمَسَاقُ

    उस दिन तेरे पालनहार ही की ओर जाना है।

    ३१

    فَلَا صَدَّقَ وَلَا صَلَّىٰ

    तो न उसने (सत्य को) माना और न नमाज़ पढ़ी।

    ३२

    وَلَٰكِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ

    लेकिन उसने झुठलाया तथा मुँह फेरा।

    ३३

    ثُمَّ ذَهَبَ إِلَىٰٓ أَهۡلِهِۦ يَتَمَطَّىٰٓ

    फिर अकड़ता हुआ अपने परिजनों की ओर गया।

    ३४

    أَوۡلَىٰ لَكَ فَأَوۡلَىٰ

    तेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।

    ३५

    ثُمَّ أَوۡلَىٰ لَكَ فَأَوۡلَىٰٓ

    फिर तेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।

    ३६

    أَيَحۡسَبُ ٱلۡإِنسَٰنُ أَن يُتۡرَكَ سُدًى

    क्या इनसान समझता है कि उसे यूँ ही बेकार छोड़ दिया जायेगा?[11]

    [11] अर्थात न उसे किसी बात का आदेश दिया जाएगा और न रोका जाएगा और न उससे कर्मों का ह़िसाब लिया जाएगा।

    ३७

    أَلَمۡ يَكُ نُطۡفَةٗ مِّن مَّنِيّٖ يُمۡنَىٰ

    क्या वह वीर्य की एक बूंद नहीं था, जो (गर्भाशय में) गिराई जाती है?

    ३८

    ثُمَّ كَانَ عَلَقَةٗ فَخَلَقَ فَسَوَّىٰ

    फिर वह जमे हुए रक्त का टुकड़ा हुआ, फिर अल्लाह ने पैदा किया और दुरुस्त बनाया।

    ३९

    فَجَعَلَ مِنۡهُ ٱلزَّوۡجَيۡنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلۡأُنثَىٰٓ

    फिर उसने उससे दो प्रकार : नर और मादा बनाए।

    ४०

    أَلَيۡسَ ذَٰلِكَ بِقَٰدِرٍ عَلَىٰٓ أَن يُحۡـِۧيَ ٱلۡمَوۡتَىٰ

    क्या वह इसमें समर्थ नहीं कि मुर्दों को जीवित कर दे?

    Al-Qiyamah

    Play