Surah As-Saffat in Hindi

    الصافات

    Surah As-Saffat in Hindi

    Read Surah As-Saffat in Hindi (الصافات) with Arabic text, Hindi translation, and audio recitation. Chapter 37 of the Holy Quran, 182 verses — free online.

    कुरान हिंदी में · all 114 सूरहs

    وَٱلصَّٰٓفَّٰتِ صَفّٗا

    क़सम है पंक्तिबद्ध (फ़रिश्तों) की!

    فَٱلزَّٰجِرَٰتِ زَجۡرٗا

    फिर झिड़क कर डाँटने वालों की!

    فَٱلتَّٰلِيَٰتِ ذِكۡرًا

    फिर (अल्लाह के) ज़िक्र (वाणी) की तिलावत करने वालों की।[1]

    [1] ये तीनों गुण फ़रिश्तों के हैं जो आकाशों में अल्लाह की इबादत के लिए पंक्तिबद्ध रहते तथा बादलों को हाँकते और अल्लाह के स्मरण जैसे क़ुरआन तथा नमाज़ पढ़ने और उसकी पवित्रता का गान करने इत्यादि में लगे रहते हैं।

    إِنَّ إِلَٰهَكُمۡ لَوَٰحِدٞ

    निःसंदेह तुम्हारा पूज्य निश्चय एक ही है।

    رَّبُّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا بَيۡنَهُمَا وَرَبُّ ٱلۡمَشَٰرِقِ

    जो आकाशों और धरती का तथा उन दोनों के बीच की समस्त चीज़ों का स्वामी है और सूर्य के उदय होने के सभी स्थानों का मालिक है।

    إِنَّا زَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنۡيَا بِزِينَةٍ ٱلۡكَوَاكِبِ

    निःसंदेह हमने संसार के आकाश को एक सुंदर शृंगार के साथ सुशोभित किया है, जो सितारे हैं।

    وَحِفۡظٗا مِّن كُلِّ شَيۡطَٰنٖ مَّارِدٖ

    और प्रत्येक सरकश शैतान से सुरक्षित करने के लिए।

    لَّا يَسَّمَّعُونَ إِلَى ٱلۡمَلَإِ ٱلۡأَعۡلَىٰ وَيُقۡذَفُونَ مِن كُلِّ جَانِبٖ

    वे सर्वोच्च सभा (मला-ए-आ'ला) के फ़रिश्तों की बात नहीं सुन सकते, तथा वे हर ओर से (उल्काओं से) मारे जाते हैं।

    دُحُورٗاۖ وَلَهُمۡ عَذَابٞ وَاصِبٌ

    भगाने के लिए। तथा उनके लिए स्थायी यातना है।

    १०

    إِلَّا مَنۡ خَطِفَ ٱلۡخَطۡفَةَ فَأَتۡبَعَهُۥ شِهَابٞ ثَاقِبٞ

    परंतु जो कोई (शैतान फरिश्तों की किसी बात को) अचानक उचक ले जाए, तो एक दहकता हुआ अंगारा (उल्का)[2] उसका पीछा करता है।

    [2] फिर यदि उससे बचा रह जाए तो आकाश की बात अपने नीचे के शैतानों तक पहुँचाता है और वे उसे काहिनों तथा ज्योतिषियों को बताते हैं। फिर वे उसमें सौ झूठ मिलाकर लोगों को बताते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारी : 6213, सह़ीह़ मुस्लिम : 2228)

    ११

    فَٱسۡتَفۡتِهِمۡ أَهُمۡ أَشَدُّ خَلۡقًا أَم مَّنۡ خَلَقۡنَآۚ إِنَّا خَلَقۡنَٰهُم مِّن طِينٖ لَّازِبِۭ

    तो आप इन (काफ़िरों) से पूछें कि क्या इन्हें पैदा करना अधिक कठिन है या उनका जिन्हें[3] हम पैदा कर चुके? निःसंदेह हमने उन्हें[4] एक लेसदार मिट्टी से पैदा किया है।

    [3] अर्थात फ़रिश्तों तथा आकाशों को। [4] अर्थात् उनके पिता आदम (अलैहिस्सलाम) को।

    १२

    بَلۡ عَجِبۡتَ وَيَسۡخَرُونَ

    बल्कि आपने आश्चर्य किया और वे उपहास करते हैं।

    १३

    وَإِذَا ذُكِّرُواْ لَا يَذۡكُرُونَ

    और जब उन्हें नसीहत की जाए, तो वे क़बूल नहीं करते।

    १४

    وَإِذَا رَأَوۡاْ ءَايَةٗ يَسۡتَسۡخِرُونَ

    और जब वे कोई निशानी देखते हैं, तो खूब उपहास करते हैं।

    १५

    وَقَالُوٓاْ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّا سِحۡرٞ مُّبِينٌ

    तथा कहते हैं कि यह तो मात्र खुला जादू है।

    १६

    أَءِذَا مِتۡنَا وَكُنَّا تُرَابٗا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَبۡعُوثُونَ

    क्या जब हम मर गए और मिट्टी तथा हड्डियाँ हो चुके, तो क्या सचमुच हम अवश्य उठाए जाने वाले हैं?

    १७

    أَوَءَابَآؤُنَا ٱلۡأَوَّلُونَ

    और क्या हमारे पहले बाप-दादा भी (उठाए जाएँगे)?

    १८

    قُلۡ نَعَمۡ وَأَنتُمۡ دَٰخِرُونَ

    आप कह दीजिए : हाँ! तथा तुम अपमानित (भी) होगे!

    १९

    فَإِنَّمَا هِيَ زَجۡرَةٞ وَٰحِدَةٞ فَإِذَا هُمۡ يَنظُرُونَ

    वह बस एक ही झिड़की होगी, तो एकाएक वे देख रहे होंगे।

    २०

    وَقَالُواْ يَٰوَيۡلَنَا هَٰذَا يَوۡمُ ٱلدِّينِ

    तथा वे कहेंगे : हाय हमारा विनाश! यह तो बदले का दिन है।

    २१

    هَٰذَا يَوۡمُ ٱلۡفَصۡلِ ٱلَّذِي كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ

    यही निर्णय का दिन है, जिसे तुम झुठलाया करते थे।

    २२

    ۞ ٱحۡشُرُواْ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ وَأَزۡوَٰجَهُمۡ وَمَا كَانُواْ يَعۡبُدُونَ

    (आदेश होगा कि) इकट्ठा करो उन लोगों को जिन्होंने अत्याचार किया तथा उनके साथियों को और जिनकी वे उपासना किया करते थे ।

    २३

    مِن دُونِ ٱللَّهِ فَٱهۡدُوهُمۡ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلۡجَحِيمِ

    अल्लाह के सिवा। फिर उन्हें जहन्नम की राह दिखा दो।

    २४

    وَقِفُوهُمۡۖ إِنَّهُم مَّسۡـُٔولُونَ

    और उन्हें ठहराओ[5], निःसंदेह वे प्रश्न किए जाने वाले हैं।

    [5] नरक में झोंकने से पहले।

    २५

    مَا لَكُمۡ لَا تَنَاصَرُونَ

    तुम्हें क्या हुआ कि तुम एक-दूसरे की सहायता नहीं करते?

    २६

    بَلۡ هُمُ ٱلۡيَوۡمَ مُسۡتَسۡلِمُونَ

    बल्कि, आज वे सर्वथा आज्ञाकारी हैं।

    २७

    وَأَقۡبَلَ بَعۡضُهُمۡ عَلَىٰ بَعۡضٖ يَتَسَآءَلُونَ

    और वे एक-दूसरे की ओर रुख़ करके परस्पर प्रश्न करेंगे।[6]

    [6] अर्थात एक-दूसरे को धिक्कारेंगे।

    २८

    قَالُوٓاْ إِنَّكُمۡ كُنتُمۡ تَأۡتُونَنَا عَنِ ٱلۡيَمِينِ

    वे कहेंगे : निःसंदेह तुम हमारे पास दाहिने[7] से आया करते थे।

    [7] इससे अभिप्राय यह है कि धर्म तथा सत्य के नाम से आते थे। अर्थात यह विश्वास दिलाते थे कि यही मिश्रणवाद मूल तथा सत्धर्म है।

    २९

    قَالُواْ بَل لَّمۡ تَكُونُواْ مُؤۡمِنِينَ

    वे[8] कहेंगे : बल्कि तुम (स्वयं) ईमान वाले न थे।

    [8] इससे अभिप्राय उन के प्रमुख लोग हैं।

    ३०

    وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيۡكُم مِّن سُلۡطَٰنِۭۖ بَلۡ كُنتُمۡ قَوۡمٗا طَٰغِينَ

    तथा हमारा तुमपर कोई ज़ोर[9] न था, बल्कि तुम (स्वंय) हद से बढ़ने वाले लोग थे।

    [9] देखिए : सूरत इबराहीम, आयत : 22

    ३१

    فَحَقَّ عَلَيۡنَا قَوۡلُ رَبِّنَآۖ إِنَّا لَذَآئِقُونَ

    तो हमपर हमारे पालनहार का कथन सिद्ध हो गया। निःसंदेह हम निश्चय (यातना) चखने वाले हैं।

    ३२

    فَأَغۡوَيۡنَٰكُمۡ إِنَّا كُنَّا غَٰوِينَ

    तो हमने तुम्हें गुमराह किया। निःसंदेह हम स्वयं गुमराह थे।

    ३३

    فَإِنَّهُمۡ يَوۡمَئِذٖ فِي ٱلۡعَذَابِ مُشۡتَرِكُونَ

    तो निश्चय ही वे उस दिन यातना में सहभागी होंगे।

    ३४

    إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفۡعَلُ بِٱلۡمُجۡرِمِينَ

    निःसंदेह हम अपराधियों के साथ ऐसा ही किया करते हैं।

    ३५

    إِنَّهُمۡ كَانُوٓاْ إِذَا قِيلَ لَهُمۡ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ يَسۡتَكۡبِرُونَ

    निःसंदेह वे ऐसे लोग थे कि जब उनसे कहा जाता कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य (इबादत के योग्य) नहीं, तो वे अभिमान करते थे।

    ३६

    وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُوٓاْ ءَالِهَتِنَا لِشَاعِرٖ مَّجۡنُونِۭ

    तथा कहते थे : क्या सचमुच हम अपने पूज्यों को एक दीवाने कवि के कारण छोड़ देने वाले हैं?

    ३७

    بَلۡ جَآءَ بِٱلۡحَقِّ وَصَدَّقَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

    बल्कि वह सत्य लेकर आए हैं तथा उन्होंने सभी रसूलों की पुष्टि की है।

    ३८

    إِنَّكُمۡ لَذَآئِقُواْ ٱلۡعَذَابِ ٱلۡأَلِيمِ

    निःसंदेह तुम निश्चय दुःखदायी यातना चखने वाले हो।

    ३९

    وَمَا تُجۡزَوۡنَ إِلَّا مَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

    तथा तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।

    ४०

    إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلۡمُخۡلَصِينَ

    परंतु अल्लाह के ख़ालिस (विशुद्ध) किए हुए बंदे।

    ४१

    أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمۡ رِزۡقٞ مَّعۡلُومٞ

    यही लोग हैं, जिनके लिए निर्धारित रोज़ी है।

    ४२

    فَوَٰكِهُ وَهُم مُّكۡرَمُونَ

    प्रत्येक प्रकार के फल। तथा वे सम्मानित किए गए हैं।

    ४३

    فِي جَنَّٰتِ ٱلنَّعِيمِ

    नेमत के बाग़ों में।

    ४४

    عَلَىٰ سُرُرٖ مُّتَقَٰبِلِينَ

    तख़्तों पर आमने-सामने बैठे होंगे।

    ४५

    يُطَافُ عَلَيۡهِم بِكَأۡسٖ مِّن مَّعِينِۭ

    उनपर प्रवाहित शराब के प्याले फिराए जाएँगे।

    ४६

    بَيۡضَآءَ لَذَّةٖ لِّلشَّٰرِبِينَ

    जो सफ़ेद होगी, पीने वालों के लिए स्वादिष्ट होगी।

    ४७

    لَا فِيهَا غَوۡلٞ وَلَا هُمۡ عَنۡهَا يُنزَفُونَ

    न उसमें कोई सिरदर्द होगा, और न वे उससे मदहोश होंगे।

    ४८

    وَعِندَهُمۡ قَٰصِرَٰتُ ٱلطَّرۡفِ عِينٞ

    तथा उनके पास दृष्टि नीची रखने वाली, बड़ी आँखों वाली स्त्रियाँ होंगी।

    ४९

    كَأَنَّهُنَّ بَيۡضٞ مَّكۡنُونٞ

    मानो वे छिपाकर रखे हुए अंडे हों।[10]

    [10] अर्थात जिस प्रकार पक्षी के पंखों के नीचे छिपे हुए अंडे सुरक्षित होते हैं, वैसे ही वे नारियाँ सुरक्षित, सुंदर रंग और रूप की होंगी।

    ५०

    فَأَقۡبَلَ بَعۡضُهُمۡ عَلَىٰ بَعۡضٖ يَتَسَآءَلُونَ

    फिर वे एक-दूसरे के सम्मुख होकर आपस में प्रश्न करेंगे।

    ५१

    قَالَ قَآئِلٞ مِّنۡهُمۡ إِنِّي كَانَ لِي قَرِينٞ

    उनमें से एक कहने वाला कहेगा : मेरा एक साथी था।

    ५२

    يَقُولُ أَءِنَّكَ لَمِنَ ٱلۡمُصَدِّقِينَ

    वह कहा करता था कि क्या सचमुच तू भी (मरणोपरांत पुनर्जीवन को) मानने वालों में से है?

    ५३

    أَءِذَا مِتۡنَا وَكُنَّا تُرَابٗا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَدِينُونَ

    क्या जब हम मर गए और हम मिट्टी तथा हड्डियाँ हो गए, तो क्या सचमुच हम अवश्य बदला दिए जाने वाले हैं?

    ५४

    قَالَ هَلۡ أَنتُم مُّطَّلِعُونَ

    वह कहेगा : क्या तुम झाँककर देखने वाले हो?

    ५५

    فَٱطَّلَعَ فَرَءَاهُ فِي سَوَآءِ ٱلۡجَحِيمِ

    फिर वह झाँकेगा, तो उसे भड़कती हुई आग के बीच में देखेगा।

    ५६

    قَالَ تَٱللَّهِ إِن كِدتَّ لَتُرۡدِينِ

    कहेगा : अल्लाह की कसम! निश्चय तू क़रीब था कि मुझे नष्ट ही कर दे।

    ५७

    وَلَوۡلَا نِعۡمَةُ رَبِّي لَكُنتُ مِنَ ٱلۡمُحۡضَرِينَ

    और यदि मेरे पालनहार की अनुकंपा न होती, तो निश्चय मैं भी (जहन्नम में) उपस्थित किए गए लोगों में से होता।

    ५८

    أَفَمَا نَحۡنُ بِمَيِّتِينَ

    तो क्या (यह सही नहीं है) कि हम कभी मरने वाले नहीं हैं?

    ५९

    إِلَّا مَوۡتَتَنَا ٱلۡأُولَىٰ وَمَا نَحۡنُ بِمُعَذَّبِينَ

    सिवाय अपनी प्रथम मौत के, और न हम कभी यातना दिए जाने वाले हैं।

    ६०

    إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ

    निश्चय यही तो बहुत बड़ी सफलता है।

    ६१

    لِمِثۡلِ هَٰذَا فَلۡيَعۡمَلِ ٱلۡعَٰمِلُونَ

    इसी (जैसी सफलता) के लिए कर्म करने वालों को कर्म करना चाहिए।

    ६२

    أَذَٰلِكَ خَيۡرٞ نُّزُلًا أَمۡ شَجَرَةُ ٱلزَّقُّومِ

    क्या यह आतिथ्य उत्तम है या थोहड़ का वृक्ष?

    ६३

    إِنَّا جَعَلۡنَٰهَا فِتۡنَةٗ لِّلظَّٰلِمِينَ

    निःसंदेह हमने उसे अत्याचारियों के लिए एक परीक्षा बनाया है।

    ६४

    إِنَّهَا شَجَرَةٞ تَخۡرُجُ فِيٓ أَصۡلِ ٱلۡجَحِيمِ

    निःसंदेह वह ऐसा वृक्ष है, जो जहन्नम के तल में उगता है।

    ६५

    طَلۡعُهَا كَأَنَّهُۥ رُءُوسُ ٱلشَّيَٰطِينِ

    उसके गुच्छे ऐसे हैं मानो वे शैतानों के सिर हों।

    ६६

    فَإِنَّهُمۡ لَأٓكِلُونَ مِنۡهَا فَمَالِـُٔونَ مِنۡهَا ٱلۡبُطُونَ

    तो वे (जहन्नमवासी) निश्चय उसमें से खाने वाले हैं। फिर उससे पेट भरने वाले हैं।

    ६७

    ثُمَّ إِنَّ لَهُمۡ عَلَيۡهَا لَشَوۡبٗا مِّنۡ حَمِيمٖ

    फिर निःसंदेह उनके लिए उसपर खौलते हुए पानी का मिश्रण है।

    ६८

    ثُمَّ إِنَّ مَرۡجِعَهُمۡ لَإِلَى ٱلۡجَحِيمِ

    फिर निःसंदेह उनकी वापसी निश्चय उसी भड़कती हुई आग की ओर होगी।

    ६९

    إِنَّهُمۡ أَلۡفَوۡاْ ءَابَآءَهُمۡ ضَآلِّينَ

    निःसंदेह उन्होंने अपने बाप-दादा को गुमराह पाया।

    ७०

    فَهُمۡ عَلَىٰٓ ءَاثَٰرِهِمۡ يُهۡرَعُونَ

    तो वे उन्हीं के पदचिह्नों पर दौड़े चले जा रहे हैं।[11]

    [11] इसमें नरक में जाने का जो सबसे बड़ा कारण बताया गया है, वह है नबी को न मानना और अपने पूर्वजों के पंथ पर ही चलते रहना।

    ७१

    وَلَقَدۡ ضَلَّ قَبۡلَهُمۡ أَكۡثَرُ ٱلۡأَوَّلِينَ

    और निःसंदेह इनसे पहले अगले लोगों में से अधिकतर लोग गुमराह हो चुके हैं।

    ७२

    وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا فِيهِم مُّنذِرِينَ

    तथा निःसंदेह हमने उनके अंदर कई डराने वाले भेजे।

    ७३

    فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُنذَرِينَ

    तो देखो कि उन डराए जाने वालों का परिणाम[12] कैसा हुआ?

    [12] अतः उनके दुष्परिणाम से शिक्षा ग्रहण करना चाहिए।

    ७४

    إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلۡمُخۡلَصِينَ

    सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।

    ७५

    وَلَقَدۡ نَادَىٰنَا نُوحٞ فَلَنِعۡمَ ٱلۡمُجِيبُونَ

    तथा निःसंदेह नूह ने हमें पुकारा, तो निश्चय हम अच्छे स्वीकार करने वाले हैं।

    ७६

    وَنَجَّيۡنَٰهُ وَأَهۡلَهُۥ مِنَ ٱلۡكَرۡبِ ٱلۡعَظِيمِ

    और हमने उसे और उसके घर वालों को बहुत बड़ी आपदा से बचा लिया।

    ७७

    وَجَعَلۡنَا ذُرِّيَّتَهُۥ هُمُ ٱلۡبَاقِينَ

    तथा हमने उसकी संतति ही को बाक़ी रहने वाला[13] बना दिया।

    [13] उसकी जाति के जलमग्न हो जाने के पश्चात्।

    ७८

    وَتَرَكۡنَا عَلَيۡهِ فِي ٱلۡأٓخِرِينَ

    और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।

    ७९

    سَلَٰمٌ عَلَىٰ نُوحٖ فِي ٱلۡعَٰلَمِينَ

    सर्व संसार में नूह़ पर सलाम[14] हो।

    [14] अर्थात उसकी बुरी चर्चा से सुरक्षा।

    ८०

    إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلۡمُحۡسِنِينَ

    निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।

    ८१

    إِنَّهُۥ مِنۡ عِبَادِنَا ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

    निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।

    ८२

    ثُمَّ أَغۡرَقۡنَا ٱلۡأٓخَرِينَ

    फिर हमने दूसरों को डुबो दिया।

    ८३

    ۞ وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِۦ لَإِبۡرَٰهِيمَ

    और निःसंदेह उसी के तरीक़े पर चलने वालों में से निश्चय इबराहीम (भी) थे।

    ८४

    إِذۡ جَآءَ رَبَّهُۥ بِقَلۡبٖ سَلِيمٍ

    (उस समय को याद करें) जब वह अपने पालनहार के पास शुद्ध दिल लेकर आए।

    ८५

    إِذۡ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوۡمِهِۦ مَاذَا تَعۡبُدُونَ

    जब उसने अपने बाप तथा अपनी जाति से कहा : तुम किस चीज़ की इबादत करते हो?

    ८६

    أَئِفۡكًا ءَالِهَةٗ دُونَ ٱللَّهِ تُرِيدُونَ

    क्या अल्लाह को छोड़कर अपने गढ़े हुए पूज्यों को चाहते हो?

    ८७

    فَمَا ظَنُّكُم بِرَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

    तो सर्व संसार के पालनहार के विषय में तुम्हारा क्या गुमान है?

    ८८

    فَنَظَرَ نَظۡرَةٗ فِي ٱلنُّجُومِ

    फिर उसने एक दृष्टि तारों पर डाली।[15]

    [15] यह सोचते हुए कि इनके उत्सव में न जाने के लिए क्या बहाना करूँ।

    ८९

    فَقَالَ إِنِّي سَقِيمٞ

    फिर कहा : मैं तो बीमार हूँ।

    ९०

    فَتَوَلَّوۡاْ عَنۡهُ مُدۡبِرِينَ

    तो वे उससे पीठ फेरकर वापस चले गए।

    ९१

    فَرَاغَ إِلَىٰٓ ءَالِهَتِهِمۡ فَقَالَ أَلَا تَأۡكُلُونَ

    फिर वह चुपके से उनके पूज्यों की ओर गया और कहा : क्या तुम खाते नहीं?

    ९२

    مَا لَكُمۡ لَا تَنطِقُونَ

    तुम्हें क्या हुआ कि तुम बोलते नहीं?

    ९३

    فَرَاغَ عَلَيۡهِمۡ ضَرۡبَۢا بِٱلۡيَمِينِ

    फिर वह दाएँ हाथ से मारते हुए उनपर पिल पड़ा।

    ९४

    فَأَقۡبَلُوٓاْ إِلَيۡهِ يَزِفُّونَ

    फिर वे दौड़ते हुए उसकी ओर आए।

    ९५

    قَالَ أَتَعۡبُدُونَ مَا تَنۡحِتُونَ

    उसने कहा : क्या तुम उसकी इबादत करते हो, जिसे ख़ुद तराशते हो?

    ९६

    وَٱللَّهُ خَلَقَكُمۡ وَمَا تَعۡمَلُونَ

    हालाँकि अल्लाह ही ने तुम्हें पैदा किया तथा उसे भी जो तुम करते हो।

    ९७

    قَالُواْ ٱبۡنُواْ لَهُۥ بُنۡيَٰنٗا فَأَلۡقُوهُ فِي ٱلۡجَحِيمِ

    उन्होंने कहा : इसके लिए एक इमारत (अग्नि-कुंड) बनाओ, फिर इसे भड़कती आग में फेंक दो।

    ९८

    فَأَرَادُواْ بِهِۦ كَيۡدٗا فَجَعَلۡنَٰهُمُ ٱلۡأَسۡفَلِينَ

    अतः उन्होंने उसके साथ एक चाल चलनी चाही, तो हमने उन्हीं को सबसे नीचा कर दिया।

    ९९

    وَقَالَ إِنِّي ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّي سَيَهۡدِينِ

    तथा उसने कहा : निःसंदेह मैं अपने पालनहार की ओर[16] जाने वाला हूँ। वह मुझे अवश्य सीधा रास्ता दिखाएगा।

    [16] अर्थात ऐसे स्थान की ओर जहाँ अपने पालनहार की इबादत कर सकूँ।

    १००

    رَبِّ هَبۡ لِي مِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ

    ऐ मेरे पालनहार! मुझे एक सदाचारी पुत्र प्रदान कर।

    १०१

    فَبَشَّرۡنَٰهُ بِغُلَٰمٍ حَلِيمٖ

    तो हमने उसे एक सहनशील पुत्र की शुभ सूचना दी।

    १०२

    فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ ٱلسَّعۡيَ قَالَ يَٰبُنَيَّ إِنِّيٓ أَرَىٰ فِي ٱلۡمَنَامِ أَنِّيٓ أَذۡبَحُكَ فَٱنظُرۡ مَاذَا تَرَىٰۚ قَالَ يَٰٓأَبَتِ ٱفۡعَلۡ مَا تُؤۡمَرُۖ سَتَجِدُنِيٓ إِن شَآءَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلصَّٰبِرِينَ

    फिर जब वह उसके साथ दौड़-धूप की आयु को पहुँचा, तो उसने कहा : ऐ मेरे प्रिय बेटे! निःसंदेह मैं स्वप्न में देखता हूँ कि मैं तुझे ज़बह कर रहा हूँ। तो अब देख, तेरा क्या विचार है? उसने कहा : ऐ मेरे पिता! आपको जो आदेश दिया जा रहा है उसे कर डालिए। अगर अल्लाह ने चाहा, तो आप अवश्य मुझे धैर्यवानों में से पाएँगे।

    १०३

    فَلَمَّآ أَسۡلَمَا وَتَلَّهُۥ لِلۡجَبِينِ

    अंततः जब दोनों (अल्लाह के आदेश के प्रति) समर्पित हो गए, और उसने उसे पेशानी के एक किनारे पर गिरा दिया।

    १०४

    وَنَٰدَيۡنَٰهُ أَن يَٰٓإِبۡرَٰهِيمُ

    और हमने उसे आवाज़ दी कि ऐ इबराहीम!

    १०५

    قَدۡ صَدَّقۡتَ ٱلرُّءۡيَآۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلۡمُحۡسِنِينَ

    निश्चय तूने स्वप्न को सच कर दिखाया। हम सदाचारियों को इसी तरह बदला प्रदान करते हैं।

    १०६

    إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلۡبَلَٰٓؤُاْ ٱلۡمُبِينُ

    निःसंदेह यही तो निश्चय खुला परीक्षण है।

    १०७

    وَفَدَيۡنَٰهُ بِذِبۡحٍ عَظِيمٖ

    और हमने उसके फ़िदया (छुड़ौती) में एक बहुत बड़ा ज़बीहा[17] दिया।

    [17] यह महान ज़बीहा एक मेंढा था। जिसे जिबरील (अलैहिस्सलाम) द्वारा स्वर्ग से भेजा गया। जो आपके प्रिय पुत्र इसमाईल (अलैहिस्सलाम) के स्थान पर ज़बह किया गया। फिर इस विधि को प्रलय तक के लिए अल्लाह के सामीप्य का एक साधन तथा ईदुल अज़हा (बक़रईद) का प्रियवर कर्म बना दिया गया। जिसे संसार के सभी मुसलमान ईदुल अज़हा में करते हैं।

    १०८

    وَتَرَكۡنَا عَلَيۡهِ فِي ٱلۡأٓخِرِينَ

    और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।

    १०९

    سَلَٰمٌ عَلَىٰٓ إِبۡرَٰهِيمَ

    सलाम हो इबराहीम पर।

    ११०

    كَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلۡمُحۡسِنِينَ

    हम इसी तरह सदाचारियों को बदला प्रदान करते हैं।

    १११

    إِنَّهُۥ مِنۡ عِبَادِنَا ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

    निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।

    ११२

    وَبَشَّرۡنَٰهُ بِإِسۡحَٰقَ نَبِيّٗا مِّنَ ٱلصَّٰلِحِينَ

    तथा हमने उसे इसहाक़ की शुभ सूचना दी, जो नबी होगा, सदाचारियों में से (होगा)।[18]

    [18] इस आयत से विदित होता है कि इबराहीम (अलैहिस्सलाम) को इस बलि के पश्चात् दूसरे पुत्र आदरणीय इसहाक़ की शुभ सूचना दी गई। इससे ज्ञात हुआ की बलि इसमाईल (अलैहिस्सलाम) की दी गई थी। और दोनों की आयु में लग-भग चौदह वर्ष का अंतर है।

    ११३

    وَبَٰرَكۡنَا عَلَيۡهِ وَعَلَىٰٓ إِسۡحَٰقَۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحۡسِنٞ وَظَالِمٞ لِّنَفۡسِهِۦ مُبِينٞ

    तथा हमने उसपर और इसहाक़ पर बरकत उतारी। और उन दोनों की संतति में से कोई सदाचारी है और कोई अपने आप पर खुला अत्याचार करने वाला है।

    ११४

    وَلَقَدۡ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَٰرُونَ

    तथा निःसंदेह हमने मूसा और हारून पर उपकार किया।

    ११५

    وَنَجَّيۡنَٰهُمَا وَقَوۡمَهُمَا مِنَ ٱلۡكَرۡبِ ٱلۡعَظِيمِ

    और हमने उन दोनों को और उन दोनों की जाति को बहुत बड़ी विपत्ति से छुटकारा दिया।

    ११६

    وَنَصَرۡنَٰهُمۡ فَكَانُواْ هُمُ ٱلۡغَٰلِبِينَ

    तथा हमने उनकी सहायता की, तो वही प्रभुत्वशाली रहे।

    ११७

    وَءَاتَيۡنَٰهُمَا ٱلۡكِتَٰبَ ٱلۡمُسۡتَبِينَ

    तथा हमने उन दोनों को अत्यंत स्पष्ट पुस्तक (तौरात) प्रदान की।

    ११८

    وَهَدَيۡنَٰهُمَا ٱلصِّرَٰطَ ٱلۡمُسۡتَقِيمَ

    और हमने उन दोनों को सीधे मार्ग पर चलाया।

    ११९

    وَتَرَكۡنَا عَلَيۡهِمَا فِي ٱلۡأٓخِرِينَ

    और हमने पीछे आने वालों में उन दोनों का अच्छा स्मरण छोड़ा।

    १२०

    سَلَٰمٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَٰرُونَ

    सलाम हो मूसा और हारून पर।

    १२१

    إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلۡمُحۡسِنِينَ

    निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।

    १२२

    إِنَّهُمَا مِنۡ عِبَادِنَا ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

    निःसंदेह वे दोनों हमारे ईमान वाले बंदों में से थे।

    १२३

    وَإِنَّ إِلۡيَاسَ لَمِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

    तथा निःसंदेह इलयास निश्चय नबियों में से थे।

    १२४

    إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِۦٓ أَلَا تَتَّقُونَ

    जब उसने अपनी जाति से कहा : क्या तुम डरते नहीं?

    १२५

    أَتَدۡعُونَ بَعۡلٗا وَتَذَرُونَ أَحۡسَنَ ٱلۡخَٰلِقِينَ

    क्या तुम 'बअ्ल' (नामक मूर्ति) को पुकारते हो? तथा पैदा करने वालों में सबस बेहतर को छोड़ देते हो?

    १२६

    ٱللَّهَ رَبَّكُمۡ وَرَبَّ ءَابَآئِكُمُ ٱلۡأَوَّلِينَ

    अल्लाह को, जो तुम्हारा पालनहार है तथा तुम्हारे पहले बाप-दादा का पालनहार है।

    १२७

    فَكَذَّبُوهُ فَإِنَّهُمۡ لَمُحۡضَرُونَ

    किंतु उन्होंने उसे झुठला दिया। तो निश्चय वे अवश्य हाज़िर किए जाने वाले हैं।

    १२८

    إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلۡمُخۡلَصِينَ

    सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।

    १२९

    وَتَرَكۡنَا عَلَيۡهِ فِي ٱلۡأٓخِرِينَ

    और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।

    १३०

    سَلَٰمٌ عَلَىٰٓ إِلۡ يَاسِينَ

    सलाम हो इल्यासीन[19] पर।

    [19] इल्यासीन इलयास ही का एक उच्चारण है। उन्हें अन्य धर्म ग्रंथों में इलया भी कहा गया है।

    १३१

    إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلۡمُحۡسِنِينَ

    निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।

    १३२

    إِنَّهُۥ مِنۡ عِبَادِنَا ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

    निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।

    १३३

    وَإِنَّ لُوطٗا لَّمِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

    और निःसंदेह लूत निश्चय रसूलों में से था।

    १३४

    إِذۡ نَجَّيۡنَٰهُ وَأَهۡلَهُۥٓ أَجۡمَعِينَ

    जब हमने उसे तथा उसके सब घर वालों को बचाया।

    १३५

    إِلَّا عَجُوزٗا فِي ٱلۡغَٰبِرِينَ

    सिवाय एक बुढ़िया[20] के, जो पीछे रह जाने वालों में से थी।

    [20] यह लूत (अलैहिस्सलाम) की काफ़िर पत्नी थी।

    १३६

    ثُمَّ دَمَّرۡنَا ٱلۡأٓخَرِينَ

    फिर हमने दूसरों का विनाश कर दिया।

    १३७

    وَإِنَّكُمۡ لَتَمُرُّونَ عَلَيۡهِم مُّصۡبِحِينَ

    तथा निःसंदेह तुम[21] निश्चय सुबह के समय जाते हुए उनपर से गुज़रते हो।

    [21] मक्का वासियों को संबोधित किया गया है।

    १३८

    وَبِٱلَّيۡلِۚ أَفَلَا تَعۡقِلُونَ

    तथा रात के समय भी। तो क्या तुम समझते नहीं?

    १३९

    وَإِنَّ يُونُسَ لَمِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

    तथा निःसंदेह यूनुस निश्चय रसूलों में से था।

    १४०

    إِذۡ أَبَقَ إِلَى ٱلۡفُلۡكِ ٱلۡمَشۡحُونِ

    जब वह भरी नाव की ओर भागकर गया।[22]

    [22] अल्लाह की अनुमति के बिना अपने नगर से नगर वासियों को यातना के आने की सूचना देकर निकल गए। और नाव पर सवार हो गए। नाव सागर की लहरों में घिर गई। इसलिए बोझ कम करने के लिए नाम निकाला गया, तो यूनुस अलैहिस्सलाम का नाम निकला और उन्हें समुद्र में फेंक दिया गया।

    १४१

    فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ ٱلۡمُدۡحَضِينَ

    फिर वह क़ुर'आ में शामिल हुआ, तो हारने वालों में से हो गया।

    १४२

    فَٱلۡتَقَمَهُ ٱلۡحُوتُ وَهُوَ مُلِيمٞ

    फिर मछली ने उसे निगल लिया, इस हाल में कि वह निंदनीय था।

    १४३

    فَلَوۡلَآ أَنَّهُۥ كَانَ مِنَ ٱلۡمُسَبِّحِينَ

    फिर अगर यह बात न होती कि वह अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करने वालों में से था।

    १४४

    لَلَبِثَ فِي بَطۡنِهِۦٓ إِلَىٰ يَوۡمِ يُبۡعَثُونَ

    तो निश्चय वह उसके पेट में उस दिन तक रहता, जिसमें लोग उठाए जाएँगे।[23]

    [23] अर्थात प्रयल के दिन तक। (देखिए : सूरतुल-अंबिया, आयत : 87)

    १४५

    ۞ فَنَبَذۡنَٰهُ بِٱلۡعَرَآءِ وَهُوَ سَقِيمٞ

    फिर हमने उसे चटियल मैदान में फेंक दिया, इस हाल में कि वह बीमार[24] था।

    [24] अर्थात निर्बल नवजात शिशु के समान।

    १४६

    وَأَنۢبَتۡنَا عَلَيۡهِ شَجَرَةٗ مِّن يَقۡطِينٖ

    तथा हमने उसपर एक लता वाला वृक्ष उगा दिया।[25]

    [25] रक्षा के लिए।

    १४७

    وَأَرۡسَلۡنَٰهُ إِلَىٰ مِاْئَةِ أَلۡفٍ أَوۡ يَزِيدُونَ

    तथा हमने उसे एक लाख की ओर भेजा, बल्कि वे अधिक होंगे।

    १४८

    فَـَٔامَنُواْ فَمَتَّعۡنَٰهُمۡ إِلَىٰ حِينٖ

    चुनाँचे वे ईमान ले आए, तो हमने उन्हें एक समय तक लाभ उठाने दिया।[26]

    [26] देखिए : सूरत यूनुस।

    १४९

    فَٱسۡتَفۡتِهِمۡ أَلِرَبِّكَ ٱلۡبَنَاتُ وَلَهُمُ ٱلۡبَنُونَ

    तो (ऐ नबी!) आप उनसे पूछें कि क्या आपके पालनहार के लिए बेटियाँ हैं और उनके लिए बेटे?

    १५०

    أَمۡ خَلَقۡنَا ٱلۡمَلَٰٓئِكَةَ إِنَٰثٗا وَهُمۡ شَٰهِدُونَ

    या हमने फ़रिश्तों को मादा पैदा किया, जबकि वे उस समय उपस्थित[27] थे?

    [27] इसमें मक्का के मिश्रणवादियों का खंडन किया जा रहा है, जो फ़रिश्तों को अल्लाह की पुत्रियाँ कहते थे। जबकि वे स्वयं पुत्रियों के जन्म को अप्रिय मानते थे।

    १५१

    أَلَآ إِنَّهُم مِّنۡ إِفۡكِهِمۡ لَيَقُولُونَ

    सुन लो! निःसंदेह वे निश्चय अपने झूठ ही से कहते हैं।

    १५२

    وَلَدَ ٱللَّهُ وَإِنَّهُمۡ لَكَٰذِبُونَ

    कि अल्लाह ने संतान बनाया है। और निःसंदेह वे निश्चय झूठे हैं।

    १५३

    أَصۡطَفَى ٱلۡبَنَاتِ عَلَى ٱلۡبَنِينَ

    क्या उसने पुत्रियों को पुत्रों पर प्राथमिकता दी?

    १५४

    مَا لَكُمۡ كَيۡفَ تَحۡكُمُونَ

    तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा फ़ैसला कर रहे हो?

    १५५

    أَفَلَا تَذَكَّرُونَ

    तो क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते?

    १५६

    أَمۡ لَكُمۡ سُلۡطَٰنٞ مُّبِينٞ

    या तुम्हारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण है?

    १५७

    فَأۡتُواْ بِكِتَٰبِكُمۡ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ

    तो लाओ अपनी किताब, यदि तुम सच्चे हो?

    १५८

    وَجَعَلُواْ بَيۡنَهُۥ وَبَيۡنَ ٱلۡجِنَّةِ نَسَبٗاۚ وَلَقَدۡ عَلِمَتِ ٱلۡجِنَّةُ إِنَّهُمۡ لَمُحۡضَرُونَ

    और उन्होंने अल्लाह तथा जिन्नों के बीच रिश्तेदारी बना दी। हालाँकि निःसंदेह जिन्न जान चुके हैं कि निःसंदेह वे (मुश्रिक) अवश्य उपस्थित किए जाने वाले हैं।[28]

    [28] अर्थात यातना के लिए। तो यदि वे उसके संबंधी होते, तो उन्हें यातना क्यों देता?

    १५९

    سُبۡحَٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ

    अल्लाह उन बातों से पवित्र है, जो वे वर्णन करते हैं।

    १६०

    إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلۡمُخۡلَصِينَ

    सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।[29]

    [29] वे अल्लाह को ऐसे दुर्गुणों से युक्त नहीं करते।

    १६१

    فَإِنَّكُمۡ وَمَا تَعۡبُدُونَ

    अतः निःसंदेह तुम तथा जिनकी तुम पूजा करते हो।

    १६२

    مَآ أَنتُمۡ عَلَيۡهِ بِفَٰتِنِينَ

    तुम उसके विरुद्ध (किसी को) बहकाने वाले नहीं।

    १६३

    إِلَّا مَنۡ هُوَ صَالِ ٱلۡجَحِيمِ

    परंतु उसको, जो भड़कती आग में प्रवेश करने वाला है।

    १६४

    وَمَا مِنَّآ إِلَّا لَهُۥ مَقَامٞ مَّعۡلُومٞ

    और हम (फ़रिश्तों) में से जो भी है उसका एक नियत स्थान है।

    १६५

    وَإِنَّا لَنَحۡنُ ٱلصَّآفُّونَ

    तथा निःसंदेह हम निश्चय पंक्तिबद्ध रहने वाले हैं।

    १६६

    وَإِنَّا لَنَحۡنُ ٱلۡمُسَبِّحُونَ

    तथा निःसंदेह हम निश्चय तस्बीह़ (पवित्रता गान) करने वाले हैं।

    १६७

    وَإِن كَانُواْ لَيَقُولُونَ

    तथा निःसंदेह वे (मुश्रिक) तो कहा करते थे

    १६८

    لَوۡ أَنَّ عِندَنَا ذِكۡرٗا مِّنَ ٱلۡأَوَّلِينَ

    यदि हमारे पास पहले लोगों की कोई शिक्षा (किताब) होती,

    १६९

    لَكُنَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلۡمُخۡلَصِينَ

    तो हम अवश्य अल्लाह के ख़ालिस (चुने हुए) बंदे होते।

    १७०

    فَكَفَرُواْ بِهِۦۖ فَسَوۡفَ يَعۡلَمُونَ

    (फिर जब किताब आ गई) तो उन्होंने उसका इनकार कर दिया। अतः जल्द ही उन्हें पता चल जाएगा।

    १७१

    وَلَقَدۡ سَبَقَتۡ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا ٱلۡمُرۡسَلِينَ

    और निःसंदेह हमारे भेजे हुए बंदों के लिए हमारी बात पहले ही निश्चित हो चुकी

    १७२

    إِنَّهُمۡ لَهُمُ ٱلۡمَنصُورُونَ

    कि निःसंदेह वही हैं, जिनकी सहायता की जाएगी।

    १७३

    وَإِنَّ جُندَنَا لَهُمُ ٱلۡغَٰلِبُونَ

    तथा निःसंदेह हमारी सेना ही निश्चय प्रभुत्वशाली रहेगी।

    १७४

    فَتَوَلَّ عَنۡهُمۡ حَتَّىٰ حِينٖ

    तो आप कुछ समय तक के लिए उनसे मुँह फेर लें।

    १७५

    وَأَبۡصِرۡهُمۡ فَسَوۡفَ يُبۡصِرُونَ

    तथा उन्हें देखते रहें। वे भी शीघ्र ही देख लेंगे।

    १७६

    أَفَبِعَذَابِنَا يَسۡتَعۡجِلُونَ

    तो क्या वे हमारी यातना की शीघ्र माँग कर रहे हैं?

    १७७

    فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمۡ فَسَآءَ صَبَاحُ ٱلۡمُنذَرِينَ

    फिर जब वह उनके आँगन में उतरेगी, तो डराए गए लोगों की सुबह बहुत बुरी होगी।

    १७८

    وَتَوَلَّ عَنۡهُمۡ حَتَّىٰ حِينٖ

    َऔर आप कुछ समय तक के लिए उनसे मुँह फेर लें।

    १७९

    وَأَبۡصِرۡ فَسَوۡفَ يُبۡصِرُونَ

    तथा देखते रहें। जल्द ही वे भी देख लेंगे।

    १८०

    سُبۡحَٰنَ رَبِّكَ رَبِّ ٱلۡعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ

    पवित्र है आपका पालनहार, पराक्रम व शक्ति का स्वामी!, उस बात से, जो वे बयान करते हैं।

    १८१

    وَسَلَٰمٌ عَلَى ٱلۡمُرۡسَلِينَ

    तथा सलाम हो रसूलों पर।

    १८२

    وَٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

    और हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सर्व संसार का पालनहार है।

    As-Saffat

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