Surah Ash-Shuara in Hindi

    الشعراء

    Surah Ash-Shuara in Hindi

    Read Surah Ash-Shuara in Hindi (الشعراء) with Arabic text, Hindi translation, and audio recitation. Chapter 26 of the Holy Quran, 227 verses — free online.

    कुरान हिंदी में · all 114 सूरहs

    طسٓمٓ

    ता, सीन, मीम।

    تِلۡكَ ءَايَٰتُ ٱلۡكِتَٰبِ ٱلۡمُبِينِ

    ये स्पष्ट किताब की आयतें हैं।

    لَعَلَّكَ بَٰخِعٞ نَّفۡسَكَ أَلَّا يَكُونُواْ مُؤۡمِنِينَ

    शायद (ऐ रसूल!) आप अपने आपको हलाक करने वाले हैं, इसलिए कि वे ईमान नहीं लाते।[1]

    [1] अर्थात उनके ईमान न लाने के शोक में।

    إِن نَّشَأۡ نُنَزِّلۡ عَلَيۡهِم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ ءَايَةٗ فَظَلَّتۡ أَعۡنَٰقُهُمۡ لَهَا خَٰضِعِينَ

    यदि हम चाहें, तो उनपर आकाश से कोई निशानी उतार दें, फिर उसके सामने उनकी गर्दनें झुकी रह जाएँ।[2]

    [2] परंतु ऐसा नहीं किया, क्योंकि दबाव का ईमान स्वीकार्य तथा मान्य नहीं होता।

    وَمَا يَأۡتِيهِم مِّن ذِكۡرٖ مِّنَ ٱلرَّحۡمَٰنِ مُحۡدَثٍ إِلَّا كَانُواْ عَنۡهُ مُعۡرِضِينَ

    और जब भी 'रह़मान' (अति दयावान्) की ओर से उनके पास कोई नई नसीहत आती है, तो वे उससे मुँह फेरने वाले होते हैं।

    فَقَدۡ كَذَّبُواْ فَسَيَأۡتِيهِمۡ أَنۢبَٰٓؤُاْ مَا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ

    अतः निःसंदेह उन्होंने झुठला दिया, तो शीघ्र ही उनके पास उस चीज़ की खबरें आ जाएँगी, जिसका वे उपहास उड़ाया करते थे।

    أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ إِلَى ٱلۡأَرۡضِ كَمۡ أَنۢبَتۡنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوۡجٖ كَرِيمٍ

    और क्या उन्होंने धरती की ओर नहीं देखा कि हमने उसमें हर उत्तम प्रकार के कितने पौधे उगाए हैं?

    إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

    निःसंदे इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी[3] है। (परंतु) उनमें से अधिकतर ईमान लाने वाले नहीं थे।

    [3] अर्थात अल्लाह के सामर्थ्य की।

    وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ

    तथा निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।

    १०

    وَإِذۡ نَادَىٰ رَبُّكَ مُوسَىٰٓ أَنِ ٱئۡتِ ٱلۡقَوۡمَ ٱلظَّٰلِمِينَ

    और जब आपके पालनहार ने मूसा को पुकारा कि उन ज़ालिम लोगों[4] के पास जाओ।

    [4] यह उस समय की बात है जब मूसा (अलैहिस्सलाम) दस वर्ष मदयन में रहकर मिस्र वापस आ रहे थे।

    ११

    قَوۡمَ فِرۡعَوۡنَۚ أَلَا يَتَّقُونَ

    फ़िरऔन की जाति के पास। क्या वे डरते नहीं?

    १२

    قَالَ رَبِّ إِنِّيٓ أَخَافُ أَن يُكَذِّبُونِ

    उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! निःसंदेह मुझे डर है कि वे मुझे झुठला देंगे।

    १३

    وَيَضِيقُ صَدۡرِي وَلَا يَنطَلِقُ لِسَانِي فَأَرۡسِلۡ إِلَىٰ هَٰرُونَ

    और मेरा सीना घुटता है और मेरी ज़बान नहीं चलती, अतः हारून की ओर संदेश भेज।

    १४

    وَلَهُمۡ عَلَيَّ ذَنۢبٞ فَأَخَافُ أَن يَقۡتُلُونِ

    और उनका मुझपर एक अपराध का आरोप है। अतः मैं डरता हूँ कि वे मुझे मार डालेंगे।

    १५

    قَالَ كَلَّاۖ فَٱذۡهَبَا بِـَٔايَٰتِنَآۖ إِنَّا مَعَكُم مُّسۡتَمِعُونَ

    (अल्लाह ने) फरमाया : ऐसा कभी नहीं होगा, अतः तुम दोनों हमारी निशानियों के साथ जाओ। निःसंदेह हम तुम्हारे साथ ख़ूब सुनने[5] वाले हैं।

    [5] अर्थात तुम दोनों की सहायता करते रहेंगे।

    १६

    فَأۡتِيَا فِرۡعَوۡنَ فَقُولَآ إِنَّا رَسُولُ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

    तो तुम दोनों फ़िरऔन के पास जाओ और कहो कि निःसंदेह हम सारे संसारों के पालनहार के संदेशवाहक हैं।

    १७

    أَنۡ أَرۡسِلۡ مَعَنَا بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ

    कि तू बनी इसराईल को हमारे साथ भेज दे।

    १८

    قَالَ أَلَمۡ نُرَبِّكَ فِينَا وَلِيدٗا وَلَبِثۡتَ فِينَا مِنۡ عُمُرِكَ سِنِينَ

    (फ़िरऔन ने) कहा : क्या हमने तुझे अपने यहाँ इस हाल में नहीं पाला कि तू बच्चा था और तू हमारे बीच अपनी आयु के कई वर्ष रहा?

    १९

    وَفَعَلۡتَ فَعۡلَتَكَ ٱلَّتِي فَعَلۡتَ وَأَنتَ مِنَ ٱلۡكَٰفِرِينَ

    और तूने अपना वह काम[6] किया, जो तूने किया। और तू अकृतज्ञों में से है।

    [6] यह क़िबती को क़त्ल करने की ओर संकेत है जो मूसा (अलैहिस्सलाम) से नबी बनाए जाने से पहले हो गया था। (देखिए : सूरतुल-क़स़स़)

    २०

    قَالَ فَعَلۡتُهَآ إِذٗا وَأَنَا۠ مِنَ ٱلضَّآلِّينَ

    (मूसा ने) कहा : मैंने उस समय वह काम इस हाल में किया कि मैं अनजानों में से था।

    २१

    فَفَرَرۡتُ مِنكُمۡ لَمَّا خِفۡتُكُمۡ فَوَهَبَ لِي رَبِّي حُكۡمٗا وَجَعَلَنِي مِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

    फिर मैं तुम्हारे पास से भाग गया, जब मैं तुमसे डरा, तो मेरे पालनहार ने मुझे हुक्म (नुबुव्वत एवं ज्ञान) प्रदान किया और मुझे रसूलों में से बना दिया।

    २२

    وَتِلۡكَ نِعۡمَةٞ تَمُنُّهَا عَلَيَّ أَنۡ عَبَّدتَّ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ

    और यह कोई उपकार है, जो तू मुझपर जता रहा है कि तूने बनी इसराईल काे ग़ुलाम बना रखा है।

    २३

    قَالَ فِرۡعَوۡنُ وَمَا رَبُّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

    फ़िरऔन ने कहा : और 'रब्बुल-आलमीन' (सारे संसारों का पालनहार) क्या है?

    २४

    قَالَ رَبُّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا بَيۡنَهُمَآۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَ

    (मूसा ने) कहा : जो आकाशों और धरती का रब है और जो उनके बीच है उसका भी, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।

    २५

    قَالَ لِمَنۡ حَوۡلَهُۥٓ أَلَا تَسۡتَمِعُونَ

    उसने अपने आस-पास के लोगों से कहा : क्या तुम सुनते नहीं?

    २६

    قَالَ رَبُّكُمۡ وَرَبُّ ءَابَآئِكُمُ ٱلۡأَوَّلِينَ

    (मूसा ने) कहा : जो तुम्हारा पालनहार तथा तुम्हारे पहले बाप-दादा का पालनहार है।

    २७

    قَالَ إِنَّ رَسُولَكُمُ ٱلَّذِيٓ أُرۡسِلَ إِلَيۡكُمۡ لَمَجۡنُونٞ

    (फ़िरऔन ने) कहा : निश्चय तुम्हारा यह रसूल, जो तुम्हारी ओर भेजा गया है, अवश्य पागल है।

    २८

    قَالَ رَبُّ ٱلۡمَشۡرِقِ وَٱلۡمَغۡرِبِ وَمَا بَيۡنَهُمَآۖ إِن كُنتُمۡ تَعۡقِلُونَ

    (मूसा ने) कहा : जो पूर्व तथा पश्चिम रब है और उसका भी जो उन दोनों के बीच है, अगर तुम समझते हो।

    २९

    قَالَ لَئِنِ ٱتَّخَذۡتَ إِلَٰهًا غَيۡرِي لَأَجۡعَلَنَّكَ مِنَ ٱلۡمَسۡجُونِينَ

    (फ़िरऔन ने) कहा : निश्चय यदि तूने मेरे अलावा किसी और को पूज्य बनाया, तो मैं तुझे अवश्य ही बंदी बनाए हुए लोगों में शामिल कर दूँगा।‌

    ३०

    قَالَ أَوَلَوۡ جِئۡتُكَ بِشَيۡءٖ مُّبِينٖ

    (मूसा ने) कहा : क्या भले ही मैं तेरे पास कोई स्पष्ट चीज़ ले आऊँ?

    ३१

    قَالَ فَأۡتِ بِهِۦٓ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّٰدِقِينَ

    उसने कहा : तू उसे ले आ, यदि तू सच्चे लोगों में से है।

    ३२

    فَأَلۡقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعۡبَانٞ مُّبِينٞ

    फिर उसने अपनी लाठी फेंक दी, तो अचानक वह एक प्रत्यक्ष अजगर बन गई।

    ३३

    وَنَزَعَ يَدَهُۥ فَإِذَا هِيَ بَيۡضَآءُ لِلنَّٰظِرِينَ

    तथा उसने अपना हाथ निकाला, तो एकाएक वह देखने वालों के लिए सफेद (चमकदार) था।

    ३४

    قَالَ لِلۡمَلَإِ حَوۡلَهُۥٓ إِنَّ هَٰذَا لَسَٰحِرٌ عَلِيمٞ

    उसने अपने आस-पास के प्रमुखों से कहा : निश्चय यह तो एक बड़ा कुशल जादूगर है।

    ३५

    يُرِيدُ أَن يُخۡرِجَكُم مِّنۡ أَرۡضِكُم بِسِحۡرِهِۦ فَمَاذَا تَأۡمُرُونَ

    जो चाहता है कि अपने जादू के साथ तुम्हें तुम्हारी धरती से निकाल[7] दे। तो तुम क्या आदेश देते हो?

    [7] अर्थात यह उग्रवाद करके हमारे देश पर अधिकार कर ले।

    ३६

    قَالُوٓاْ أَرۡجِهۡ وَأَخَاهُ وَٱبۡعَثۡ فِي ٱلۡمَدَآئِنِ حَٰشِرِينَ

    उन्होंने कहा : इसके तथा इसके भाई को मोहलत दें और नगरों में (लोगों को) जमा करने वालों को भेज दें।

    ३७

    يَأۡتُوكَ بِكُلِّ سَحَّارٍ عَلِيمٖ

    कि वे तेरे पास हर बड़ा जादूगर ले आएँ, जो जादू में बहुत कुशल हो।

    ३८

    فَجُمِعَ ٱلسَّحَرَةُ لِمِيقَٰتِ يَوۡمٖ مَّعۡلُومٖ

    तो जादूगर एक निश्चित दिन के नियत समय पर इकट्ठा कर लिए गए।

    ३९

    وَقِيلَ لِلنَّاسِ هَلۡ أَنتُم مُّجۡتَمِعُونَ

    तथा लोगों से कहा गया : क्या तुम एकत्र होने वाले[8] हो?

    [8] अर्थात लोगों को प्रेरणा दी जा रही है कि इस प्रतियोगिता में अवश्य उपस्थित हों।

    ४०

    لَعَلَّنَا نَتَّبِعُ ٱلسَّحَرَةَ إِن كَانُواْ هُمُ ٱلۡغَٰلِبِينَ

    शायद हम इन जादूगरों के अनुयायी बन जाएँ, यदि वही विजयी हों।

    ४१

    فَلَمَّا جَآءَ ٱلسَّحَرَةُ قَالُواْ لِفِرۡعَوۡنَ أَئِنَّ لَنَا لَأَجۡرًا إِن كُنَّا نَحۡنُ ٱلۡغَٰلِبِينَ

    फिर जब जादूगर आ गए, तो उन्होंने फ़िरऔन से कहा : क्या सचमुच हमें कुछ पुरस्कार मिलेगा, यदि हम ही प्रभावी रहे?

    ४२

    قَالَ نَعَمۡ وَإِنَّكُمۡ إِذٗا لَّمِنَ ٱلۡمُقَرَّبِينَ

    उसने कहा : हाँ! और निश्चय तुम उस समय निकटवर्तियों में से हो जाओगे ।

    ४३

    قَالَ لَهُم مُّوسَىٰٓ أَلۡقُواْ مَآ أَنتُم مُّلۡقُونَ

    मूसा ने उनसे कहा : फेंको, जो कुछ तुम फेंकने वाले हो।

    ४४

    فَأَلۡقَوۡاْ حِبَالَهُمۡ وَعِصِيَّهُمۡ وَقَالُواْ بِعِزَّةِ فِرۡعَوۡنَ إِنَّا لَنَحۡنُ ٱلۡغَٰلِبُونَ

    तो उन्होंने अपनी रस्सियाँ और लाठियाँ फेंकीं और कहा : फ़िरऔन के प्रभुत्व की सौगंध! निःसंदेह हम, निश्चय हम ही विजयी रहेंगे।

    ४५

    فَأَلۡقَىٰ مُوسَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ تَلۡقَفُ مَا يَأۡفِكُونَ

    फिर मूसा ने अपनी लाठी फेंकी, तो एकाएक वह उन चीज़ों को निगल रही थी, जो वे झूठ बना रहे थे।

    ४६

    فَأُلۡقِيَ ٱلسَّحَرَةُ سَٰجِدِينَ

    इसपर जादूगर सजदा करते हुए गिर गए।[9]

    [9] क्योंकि उन्हें विश्वास हो गया कि मूसा (अलैहिस्सलाम) जादूगर नहीं, बल्कि वह सत्य के उपदेशक हैं।

    ४७

    قَالُوٓاْ ءَامَنَّا بِرَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

    उन्होंने कहा : हम सारे संसारों के पालनहार पर ईमान ले आए।

    ४८

    رَبِّ مُوسَىٰ وَهَٰرُونَ

    मूसा तथा हारून के पालनहार पर।

    ४९

    قَالَ ءَامَنتُمۡ لَهُۥ قَبۡلَ أَنۡ ءَاذَنَ لَكُمۡۖ إِنَّهُۥ لَكَبِيرُكُمُ ٱلَّذِي عَلَّمَكُمُ ٱلسِّحۡرَ فَلَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَۚ لَأُقَطِّعَنَّ أَيۡدِيَكُمۡ وَأَرۡجُلَكُم مِّنۡ خِلَٰفٖ وَلَأُصَلِّبَنَّكُمۡ أَجۡمَعِينَ

    (फ़िरऔन ने) कहा : तुम उसपर ईमान ले आए, इससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति दूँ? निःसंदेह यह अवश्य तुम्हारा बड़ा (गुरू) है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है। अतः निश्चय तुम जल्दी जान लोगे। मैं अवश्य तुम्हारे हाथ और तुम्हारे पाँव विपरीत दिशा[10] से काट दूँगा तथा निश्चय तुम सभी को अवश्य बुरी तरह सूली पर चढ़ा दूँगा।

    [10] अर्थात दाँया हाथ और बायाँ पैर या बायाँ हाथ और दायाँ पैर।

    ५०

    قَالُواْ لَا ضَيۡرَۖ إِنَّآ إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَ

    उन्होंने कहा : कोई नुक़सान नहीं, निश्चित रूप से हम अपने पालनहार की ओर पलटने वाले हैं।

    ५१

    إِنَّا نَطۡمَعُ أَن يَغۡفِرَ لَنَا رَبُّنَا خَطَٰيَٰنَآ أَن كُنَّآ أَوَّلَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

    हम आशा रखते हैं कि हमारा पालनहार हमारे लिए, हमारे पापों को क्षमा कर देगा, इस कारण कि हम सबसे पहले ईमान लाने वाले हैं।

    ५२

    ۞ وَأَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنۡ أَسۡرِ بِعِبَادِيٓ إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ

    और हमने मूसा की ओर वह़्य की कि मेरे बंदों को लेकर रातों-रात निकल जा। निश्चय ही तुम्हारा पीछा किया जाएगा।

    ५३

    فَأَرۡسَلَ فِرۡعَوۡنُ فِي ٱلۡمَدَآئِنِ حَٰشِرِينَ

    तो फ़िरऔन ने नगरों में (सेना) एकत्र करने वालों को भेज दिया।[11]

    [11] जब मूसा (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के आदेशानुसार अपने साथियों को लेकर निकल गए तो फ़िरऔन ने उनका पीछा करने के लिए नगरों में हरकारे भेजे।

    ५४

    إِنَّ هَٰٓؤُلَآءِ لَشِرۡذِمَةٞ قَلِيلُونَ

    कि निःसंदेह ये लोग एक छोटा-सा समूह हैं।

    ५५

    وَإِنَّهُمۡ لَنَا لَغَآئِظُونَ

    और निःसंदेह ये हमें निश्चित रूप से गुस्सा दिलाने वाले हैं।

    ५६

    وَإِنَّا لَجَمِيعٌ حَٰذِرُونَ

    और निश्चय ही हम सब चौकन्ना रहने वाले हैं।

    ५७

    فَأَخۡرَجۡنَٰهُم مِّن جَنَّٰتٖ وَعُيُونٖ

    इस तरह हमने उन्हें बाग़ों और सोतों से निकाल दिया।

    ५८

    وَكُنُوزٖ وَمَقَامٖ كَرِيمٖ

    तथा ख़ज़ानों और उत्तम आवासों से।

    ५९

    كَذَٰلِكَۖ وَأَوۡرَثۡنَٰهَا بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ

    ऐसा ही हुआ और हमने उनका वारिस बनी इसराईल को बना दिया।

    ६०

    فَأَتۡبَعُوهُم مُّشۡرِقِينَ

    तो उन्होंने सूर्योदय के समय उनका पीछा किया।

    ६१

    فَلَمَّا تَرَٰٓءَا ٱلۡجَمۡعَانِ قَالَ أَصۡحَٰبُ مُوسَىٰٓ إِنَّا لَمُدۡرَكُونَ

    फिर जब दोनों गिरोहों ने एक-दूसरे को देखा, तो मूसा के साथियों ने कहा : निःसंदेह हम निश्चय ही पकड़े जाने[12] वाले हैं।

    [12] क्योंकि अब सामने सागर और पीछे फ़िरऔन की सेना थी।

    ६२

    قَالَ كَلَّآۖ إِنَّ مَعِيَ رَبِّي سَيَهۡدِينِ

    (मूसा ने) कहा : हरगिज़ नहीं! निश्चय मेरे साथ मेरा पालनहार है। वह अवश्य मेरा मार्गदर्शन करेगा।

    ६३

    فَأَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنِ ٱضۡرِب بِّعَصَاكَ ٱلۡبَحۡرَۖ فَٱنفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرۡقٖ كَٱلطَّوۡدِ ٱلۡعَظِيمِ

    तो हमने मूसा की ओर वह़्य की कि अपनी लाठी को सागर पर मारो। (उसने लाठी मारी) तो वह फट गया और हर टुकड़ा बड़े पहाड़ की[13] तरह हो गया।

    [13] अर्थात बीच से मार्ग बन गया और दोनों ओर पानी पर्वत के समान खड़ा हो गया।

    ६४

    وَأَزۡلَفۡنَا ثَمَّ ٱلۡأٓخَرِينَ

    तथा वहीं हम दूसरों को निकट ले आए।

    ६५

    وَأَنجَيۡنَا مُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُۥٓ أَجۡمَعِينَ

    और हमने मूसा को और जो उसके साथ थे, सबको बचा लिया।

    ६६

    ثُمَّ أَغۡرَقۡنَا ٱلۡأٓخَرِينَ

    फिर हमने दूसरों को डुबो दिया।

    ६७

    إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

    निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे।

    ६८

    وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ

    और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् हैl

    ६९

    وَٱتۡلُ عَلَيۡهِمۡ نَبَأَ إِبۡرَٰهِيمَ

    तथा आप उन्हें इबराहीम का समाचार सुनाएँ।

    ७०

    إِذۡ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوۡمِهِۦ مَا تَعۡبُدُونَ

    जब उसने अपने बाप तथा अपनी जाति से कहा : तुम किसकी पूजा करते हो?

    ७१

    قَالُواْ نَعۡبُدُ أَصۡنَامٗا فَنَظَلُّ لَهَا عَٰكِفِينَ

    उन्होंने कहा : हम कुछ मूर्तियों की पूजा करते हैं, इसलिए उन्हीं की सेवा में लगे रहते हैं।

    ७२

    قَالَ هَلۡ يَسۡمَعُونَكُمۡ إِذۡ تَدۡعُونَ

    उसने कहा : क्या वे तुम्हें सुनते हैं, जब तुम (उन्हें) पुकारते हो?

    ७३

    أَوۡ يَنفَعُونَكُمۡ أَوۡ يَضُرُّونَ

    या तुम्हें लाभ देते हैं, या हानि पहुँचाते हैं?

    ७४

    قَالُواْ بَلۡ وَجَدۡنَآ ءَابَآءَنَا كَذَٰلِكَ يَفۡعَلُونَ

    उन्होंने कहा : बल्कि हमने अपने बाप-दादा को पाया कि वे ऐसा ही करते थे।

    ७५

    قَالَ أَفَرَءَيۡتُم مَّا كُنتُمۡ تَعۡبُدُونَ

    उसने कहा : तो क्या तुमने देखा कि जिनको तुम पूजते रहे।

    ७६

    أَنتُمۡ وَءَابَآؤُكُمُ ٱلۡأَقۡدَمُونَ

    तुम तथा तुम्हारे पहले बाप-दादा?

    ७७

    فَإِنَّهُمۡ عَدُوّٞ لِّيٓ إِلَّا رَبَّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

    सो निःसंदेह वे मेरे शत्रु हैं, सिवाय सारे संसारों के पालनहार के।

    ७८

    ٱلَّذِي خَلَقَنِي فَهُوَ يَهۡدِينِ

    वह जिसने मुझे पैदा किया, फिर वही मेरा मार्गदर्शन करता है।

    ७९

    وَٱلَّذِي هُوَ يُطۡعِمُنِي وَيَسۡقِينِ

    और वही जो मुझे खिलाता है और मुझे पिलाता है।

    ८०

    وَإِذَا مَرِضۡتُ فَهُوَ يَشۡفِينِ

    और जब मैं बीमार होता हूँ, तो वही मुझे अच्छा करता है।

    ८१

    وَٱلَّذِي يُمِيتُنِي ثُمَّ يُحۡيِينِ

    तथा वह जो मुझे मारेगा, फिर[14] मुझे जीवित करेगा।

    [14] अर्थात प्रलय के दिन अपने कर्मों का फल भोगने के लिए।

    ८२

    وَٱلَّذِيٓ أَطۡمَعُ أَن يَغۡفِرَ لِي خَطِيٓـَٔتِي يَوۡمَ ٱلدِّينِ

    तथा वह, जिससे मैं आशा रखता हूँ कि वह बदले के दिन मेरे पाप क्षमा कर देगा।

    ८३

    رَبِّ هَبۡ لِي حُكۡمٗا وَأَلۡحِقۡنِي بِٱلصَّٰلِحِينَ

    ऐ मेरे पालनहार! मुझे हुक्म (धर्म का ज्ञान) प्रदान कर और मुझे नेक लोगों के साथ मिला।

    ८४

    وَٱجۡعَل لِّي لِسَانَ صِدۡقٖ فِي ٱلۡأٓخِرِينَ

    और बाद में आने वालों में मुझे सच्ची ख्याति प्रदान कर।

    ८५

    وَٱجۡعَلۡنِي مِن وَرَثَةِ جَنَّةِ ٱلنَّعِيمِ

    और मुझे नेमतों वाली जन्नत के वारिसों में से बना दे।

    ८६

    وَٱغۡفِرۡ لِأَبِيٓ إِنَّهُۥ كَانَ مِنَ ٱلضَّآلِّينَ

    तथा मेरे बाप को क्षमा कर दे।[15] निश्चय वह गुमराहों में से था।

    [15] (देखिए : सूरतुत-तौबा, आयत : 114)

    ८७

    وَلَا تُخۡزِنِي يَوۡمَ يُبۡعَثُونَ

    तथा मुझे रुसवा न कर, जिस दिन लोग उठाए जाएँगे।[16]

    [16] ह़दीस में वर्णित है कि प्रलय के दिन इबराहीम अलैहिस्सलाम अपने बाप से मिलेंगे। और कहेंगे : ऐ मेरे पालनहार! तूने मुझे वचन दिया था कि मुझे पुनः जीवित होने के दिन अपमानित नहीं करेगा। तो अल्लाह कहेगा : मैंने स्वर्ग को काफ़िरों के लिए अवैध कर दिया है। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4769)

    ८८

    يَوۡمَ لَا يَنفَعُ مَالٞ وَلَا بَنُونَ

    जिस दिन न कोई धन लाभ देगा और न बेटे।

    ८९

    إِلَّا مَنۡ أَتَى ٱللَّهَ بِقَلۡبٖ سَلِيمٖ

    परंतु जो अल्लाह के पास पाक-साफ़ दिल लेकर आया।

    ९०

    وَأُزۡلِفَتِ ٱلۡجَنَّةُ لِلۡمُتَّقِينَ

    और (अपने रब से) डरने वालों के लिए जन्नत निकट लाई जाएगी।

    ९१

    وَبُرِّزَتِ ٱلۡجَحِيمُ لِلۡغَاوِينَ

    तथा पथभ्रष्ट लोगों के लिए भड़कती आग प्रकट कर दी जाएगी।

    ९२

    وَقِيلَ لَهُمۡ أَيۡنَ مَا كُنتُمۡ تَعۡبُدُونَ

    तथा उनसे कहा जाएगा : कहाँ हैं वे, जिन्हें तुम पूजते थे?

    ९३

    مِن دُونِ ٱللَّهِ هَلۡ يَنصُرُونَكُمۡ أَوۡ يَنتَصِرُونَ

    अल्लाह के सिवा। क्या वे तुम्हारी मदद करते हैं, या अपनी रक्षा करते हैं?

    ९४

    فَكُبۡكِبُواْ فِيهَا هُمۡ وَٱلۡغَاوُۥنَ

    फिर वे और सब पथभ्रष्ट लोग उसमें औंधे मुँह फेंक दिए जाएँगे।

    ९५

    وَجُنُودُ إِبۡلِيسَ أَجۡمَعُونَ

    और इबलीस की समस्त सेनाएँ भी।

    ९६

    قَالُواْ وَهُمۡ فِيهَا يَخۡتَصِمُونَ

    वे उसमें आपस में झगड़ते हुए कहेंगे :

    ९७

    تَٱللَّهِ إِن كُنَّا لَفِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٍ

    अल्लाह की क़सम! निःसंदेह हम निश्चय खुली गुमराही में थे।

    ९८

    إِذۡ نُسَوِّيكُم بِرَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

    जब हम तुम्हें सारे संसारों के पालनहार के बराबर ठहराते थे।

    ९९

    وَمَآ أَضَلَّنَآ إِلَّا ٱلۡمُجۡرِمُونَ

    और हमें तो सिर्फ़ इन अपराधियों ने गुमराह किया।

    १००

    فَمَا لَنَا مِن شَٰفِعِينَ

    अब न हमारे लिए कोई सिफारिश करने वाले हैं।

    १०१

    وَلَا صَدِيقٍ حَمِيمٖ

    और न कोई घनिष्ट मित्र।

    १०२

    فَلَوۡ أَنَّ لَنَا كَرَّةٗ فَنَكُونَ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

    तो यदि वास्तव में हमारे लिए वापस जाने का अवसर होता, तो हम ईमानवालों में से हो जाते।[17]

    [17] इस आयत में संकेत है कि संसार में एक ही जीवन कर्म के लिए मिलता है। और दूसरा जीवन परलोक में कर्मों के फल के लिए मिलेगा।

    १०३

    إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

    निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।

    १०४

    وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ

    और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली,[18] अत्यंत दयावान् हैl

    [18] परंतु लोग स्वयं अत्याचार करके नरक के भागी बन रहे हैं।

    १०५

    كَذَّبَتۡ قَوۡمُ نُوحٍ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

    नूह़ की जाति ने रसूलों को झुठलाया।

    १०६

    إِذۡ قَالَ لَهُمۡ أَخُوهُمۡ نُوحٌ أَلَا تَتَّقُونَ

    जब उनसे उनके भाई नूह़ ने कहा : क्या तुम डरते नहीं?

    १०७

    إِنِّي لَكُمۡ رَسُولٌ أَمِينٞ

    निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।[19]

    [19] अल्लाह का संदेश बिना कमी और अधिकता के तुम्हें पहुँचा रहा हूँ।

    १०८

    فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ

    अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।

    १०९

    وَمَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

    मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता। मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।

    ११०

    فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ

    अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।

    १११

    ۞ قَالُوٓاْ أَنُؤۡمِنُ لَكَ وَٱتَّبَعَكَ ٱلۡأَرۡذَلُونَ

    उन्होंने कहा : क्या हम तुझपर ईमान ले आएँ, जबकि तेरे पीछे चलने वाले अत्यंत नीच[20] लोग हैं?

    [20] अर्थात धनी नहीं, निर्धन लोग कर रहे हैं।

    ११२

    قَالَ وَمَا عِلۡمِي بِمَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

    (नूह़ ने) कहा : मूझे क्या मालूम कि वे क्या कर्म करते रहे हैं?

    ११३

    إِنۡ حِسَابُهُمۡ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّيۖ لَوۡ تَشۡعُرُونَ

    उनका ह़िसाब तो मेरे पालनहार ही के ज़िम्मे है, यदि तुम समझो।

    ११४

    وَمَآ أَنَا۠ بِطَارِدِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

    और मैं ईमान वालों को धुतकारने वाला[21] नहीं हूँ।

    [21] अर्थात मैं हीन वर्ग के लोगों को जो ईमान लाए हैं, अपने से दूर नहीं कर सकता जैसा कि तुम चाहते हो।

    ११५

    إِنۡ أَنَا۠ إِلَّا نَذِيرٞ مُّبِينٞ

    मैं तो बस एक खुला डराने वाला हूँ

    ११६

    قَالُواْ لَئِن لَّمۡ تَنتَهِ يَٰنُوحُ لَتَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡمَرۡجُومِينَ

    उन्होंने कहा : ऐ नूह़! यदि तू बाज़ नहीं आया, तो अवश्य संगसार किए गए लोगों में से हो जाएगा।

    ११७

    قَالَ رَبِّ إِنَّ قَوۡمِي كَذَّبُونِ

    उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! निःसंदेह मेरी जाति ने मुझे झुठला दिया!

    ११८

    فَٱفۡتَحۡ بَيۡنِي وَبَيۡنَهُمۡ فَتۡحٗا وَنَجِّنِي وَمَن مَّعِيَ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

    अतः तू मेरे और उनके बीच दो-टूक निर्णय कर दे, तथा मुझे और जो ईमानवाले मेरे साथ हैं, उन्हें बचा ले।

    ११९

    فَأَنجَيۡنَٰهُ وَمَن مَّعَهُۥ فِي ٱلۡفُلۡكِ ٱلۡمَشۡحُونِ

    तो हमने उसे और उन लोगों को जो उसके साथ भरी हुई नाव में थे, बचा लिया।

    १२०

    ثُمَّ أَغۡرَقۡنَا بَعۡدُ ٱلۡبَاقِينَ

    फिर उसके बाद शेष लोगों को डुबो दिया।

    १२१

    إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

    निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।

    १२२

    وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ

    और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।

    १२३

    كَذَّبَتۡ عَادٌ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

    आद ने रसूलों को झुठलाया।

    १२४

    إِذۡ قَالَ لَهُمۡ أَخُوهُمۡ هُودٌ أَلَا تَتَّقُونَ

    जब उनसे उनके भाई हूद[22] ने कहा : क्या तुम डरते नहीं हो?

    [22] आद जाति के नबी हूद (अलैहिस्सलाम) को उनका भाई कहा गया है; क्योंकि वह भी उन्हीं के समुदाय में से थे।

    १२५

    إِنِّي لَكُمۡ رَسُولٌ أَمِينٞ

    निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।

    १२६

    فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ

    अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।

    १२७

    وَمَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

    मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।

    १२८

    أَتَبۡنُونَ بِكُلِّ رِيعٍ ءَايَةٗ تَعۡبَثُونَ

    क्या तुम हर ऊँचे स्थान पर एक स्मारक बनाते हो? इस स्थिति में कि व्यर्थ कार्य करते हो।

    १२९

    وَتَتَّخِذُونَ مَصَانِعَ لَعَلَّكُمۡ تَخۡلُدُونَ

    तथा बड़े-बड़े भवन बनाते हो, शायद कि तुम सदा जीवित रहोगे।

    १३०

    وَإِذَا بَطَشۡتُم بَطَشۡتُمۡ جَبَّارِينَ

    और जब तुम पकड़ते हो, तो बड़ी निर्दयता से पकड़ते हो।

    १३१

    فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ

    अतः अल्लाह से डरो और जो मैं कहता हूँ, उसे मानो।

    १३२

    وَٱتَّقُواْ ٱلَّذِيٓ أَمَدَّكُم بِمَا تَعۡلَمُونَ

    तथा उससे डरो जिसने उन चीज़ों से तुम्हारी मदद की, जिन्हें तुम जानते हो।

    १३३

    أَمَدَّكُم بِأَنۡعَٰمٖ وَبَنِينَ

    उसने चौपायों और बेटों से तुम्हारी मदद की।

    १३४

    وَجَنَّٰتٖ وَعُيُونٍ

    तथा बाग़ों और जल स्रोताें से।

    १३५

    إِنِّيٓ أَخَافُ عَلَيۡكُمۡ عَذَابَ يَوۡمٍ عَظِيمٖ

    निश्चय ही मैं तुमपर एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ।

    १३६

    قَالُواْ سَوَآءٌ عَلَيۡنَآ أَوَعَظۡتَ أَمۡ لَمۡ تَكُن مِّنَ ٱلۡوَٰعِظِينَ

    उन्होंने कहा : हमारे लिए बराबर है कि तू नसीहत करे, या नसीहत करने वालों में से हो।

    १३७

    إِنۡ هَٰذَآ إِلَّا خُلُقُ ٱلۡأَوَّلِينَ

    यह तो केवल पहले लोगों की आदत है।[23]

    [23] अर्थात प्राचीन युग से होती चली आ रही है।

    १३८

    وَمَا نَحۡنُ بِمُعَذَّبِينَ

    और हम निश्चित रूप से दंडित नहीं होंगे।

    १३९

    فَكَذَّبُوهُ فَأَهۡلَكۡنَٰهُمۡۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

    तो उन्होंने उसे झुठला दिया, तो हमने उन्हें विनष्ट कर दिया। निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर लोग ईमानवाले नहीं थे।

    १४०

    وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ

    तथा निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।

    १४१

    كَذَّبَتۡ ثَمُودُ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

    समूद ने रसूलों[24] को झुठलाया।

    [24] यहाँ यह बात याद रखने की है कि एक रसूल का इनकार सभी रसूलों का इनकार है; क्योंकि सबका उपदेश एक ही था।

    १४२

    إِذۡ قَالَ لَهُمۡ أَخُوهُمۡ صَٰلِحٌ أَلَا تَتَّقُونَ

    जब उनसे उनके भाई सालेह़ ने कहा : क्या तुम डरते नहीं हो?

    १४३

    إِنِّي لَكُمۡ رَسُولٌ أَمِينٞ

    निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।

    १४४

    فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ

    अतः अल्लाह से डरो और जो मैं कहता हूँ, उसका पालन करो।

    १४५

    وَمَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

    मैं इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता। मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।

    १४६

    أَتُتۡرَكُونَ فِي مَا هَٰهُنَآ ءَامِنِينَ

    क्या तुम उन चीज़ों में जो यहाँ हैं, निश्चिंत छोड़ दिए जाओगे?

    १४७

    فِي جَنَّٰتٖ وَعُيُونٖ

    बाग़ों तथा स्रोतों में।

    १४८

    وَزُرُوعٖ وَنَخۡلٖ طَلۡعُهَا هَضِيمٞ

    तथा खेतों और खजूर के पेड़ों में, जिनके फल मुलायम और पके हुए हैं।

    १४९

    وَتَنۡحِتُونَ مِنَ ٱلۡجِبَالِ بُيُوتٗا فَٰرِهِينَ

    तथा तुम पर्वतों को काटकर बड़ी निपुणता के साथ घर बनाते हो।

    १५०

    فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ

    अतः अल्लाह से डरो और मेरा आज्ञापालन करो।

    १५१

    وَلَا تُطِيعُوٓاْ أَمۡرَ ٱلۡمُسۡرِفِينَ

    और हद से आगे बढ़ने वालों का हुक्म न मानो।

    १५२

    ٱلَّذِينَ يُفۡسِدُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا يُصۡلِحُونَ

    जो धरती में बिगाड़ पैदा करते हैं और सुधार नहीं करते।

    १५३

    قَالُوٓاْ إِنَّمَآ أَنتَ مِنَ ٱلۡمُسَحَّرِينَ

    उन्होंने कहा : निःसंदेह तू उन लोगों में से है जिनपर प्रबल जादू किया गया है।

    १५४

    مَآ أَنتَ إِلَّا بَشَرٞ مِّثۡلُنَا فَأۡتِ بِـَٔايَةٍ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّٰدِقِينَ

    तू तो बस हमारे ही जैसा एक मनुष्य है। अतः कोई निशानी ले आ, यदि तू सच्चों में से है।

    १५५

    قَالَ هَٰذِهِۦ نَاقَةٞ لَّهَا شِرۡبٞ وَلَكُمۡ شِرۡبُ يَوۡمٖ مَّعۡلُومٖ

    उसने कहा : यह एक ऊँटनी[25] है। इसके लिए पानी पीने की एक बारी है और तुम्हारे लिए एक निश्चित दिन पानी पीने की बारी है।

    [25] अर्थता यह ऊँटनी चमत्कार है जो उनकी माँग पर पत्थर से निकली थी।

    १५६

    وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوٓءٖ فَيَأۡخُذَكُمۡ عَذَابُ يَوۡمٍ عَظِيمٖ

    तथा उसे किसी बुराई से हाथ न लगाना, अन्यथा तुम्हें एक बड़े दिन की यातना पकड़ लेगी।

    १५७

    فَعَقَرُوهَا فَأَصۡبَحُواْ نَٰدِمِينَ

    तो उन्होंने उसकी कूँचें काट दीं, फिर पछताने वाले हो गए।

    १५८

    فَأَخَذَهُمُ ٱلۡعَذَابُۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

    तो उन्हें यातना ने पकड़ लिया। निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।

    १५९

    وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ

    और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।

    १६०

    كَذَّبَتۡ قَوۡمُ لُوطٍ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

    लूत की जाति ने रसूलों को झुठलाया।

    १६१

    إِذۡ قَالَ لَهُمۡ أَخُوهُمۡ لُوطٌ أَلَا تَتَّقُونَ

    जब उनके भाई लूत ने उनसे कहा : क्या तुम डरते नहीं हो?

    १६२

    إِنِّي لَكُمۡ رَسُولٌ أَمِينٞ

    निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।

    १६३

    فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ

    अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।

    १६४

    وَمَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

    मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।

    १६५

    أَتَأۡتُونَ ٱلذُّكۡرَانَ مِنَ ٱلۡعَٰلَمِينَ

    क्या सभी संसारों में से तुम पुरुषों के पास आते[26] हो।

    [26] इस कुकर्म का आरंभ संसार में लूत (अलैहिस्सलाम) की जाति से हुआ। और अब यह कुकर्म पूरे विश्व में विशेष रूप से यूरोपीय देशों में व्यापक है। और समलैंगिक विवाह को यूरोप के बहुत-से देशों में वैध मान लिया गया है। जिसके कारण कभी भी उन पर अल्लाह की यातना आ सकती है।

    १६६

    وَتَذَرُونَ مَا خَلَقَ لَكُمۡ رَبُّكُم مِّنۡ أَزۡوَٰجِكُمۚ بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٌ عَادُونَ

    तथा उन्हें छोड़ देते हो, जो तुम्हारे पालनहार ने तुम्हारे लिए तुम्हारी पत्नियाँ पैदा की हैं। बल्कि तुम हद से आगे बढ़ने वाले लोग हो।

    १६७

    قَالُواْ لَئِن لَّمۡ تَنتَهِ يَٰلُوطُ لَتَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡمُخۡرَجِينَ

    उन्होंने कहा : ऐ लूत! निःसंदेह यदि तू नहीं रुका, तो निश्चित रूप से तू अवश्य निष्कासित लोगों में से हो जाएगा।

    १६८

    قَالَ إِنِّي لِعَمَلِكُم مِّنَ ٱلۡقَالِينَ

    उसने कहा : निःसंदेह मैं तुम्हारे काम से सख़्त घृणा करने वालों में से हूँ।

    १६९

    رَبِّ نَجِّنِي وَأَهۡلِي مِمَّا يَعۡمَلُونَ

    ऐ मेरे पालनहार! मुझे तथा मेरे घर वालों को उससे बचा ले, जो ये करते हैं।

    १७०

    فَنَجَّيۡنَٰهُ وَأَهۡلَهُۥٓ أَجۡمَعِينَ

    तो हमने उसे और उसके सभी घर वालों को बचा लिया।

    १७१

    إِلَّا عَجُوزٗا فِي ٱلۡغَٰبِرِينَ

    सिवाय एक बुढ़िया[27] के, जो पीछे रहने वालों में से थी।

    [27] इससे अभिप्रेत लूत (अलैहिस्सलाम) की काफ़िर पत्नी थी।

    १७२

    ثُمَّ دَمَّرۡنَا ٱلۡأٓخَرِينَ

    फिर हमने दूसरों को विनष्ट कर दिया।

    १७३

    وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهِم مَّطَرٗاۖ فَسَآءَ مَطَرُ ٱلۡمُنذَرِينَ

    और हमने उनपर ज़ोरदार बारिश[28] बरसाई। तो उन लोगों की बारिश बहुत बुरी थी, जिन्हें डराया गया था।

    [28] अर्थात पत्थरों की बारिश। (देखिए : सूरत हूद, आयत : 82-83)

    १७४

    إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

    निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।

    १७५

    وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ

    और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।

    १७६

    كَذَّبَ أَصۡحَٰبُ لۡـَٔيۡكَةِ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

    ऐका[29] वालों ने रसूलों को झुठलाया।

    [29] ऐका का अर्थ झाड़ी है। यह मदयन का क्षेत्र है जिसमें शुऐब अलैहिस्सलाम को भेजा गया था।

    १७७

    إِذۡ قَالَ لَهُمۡ شُعَيۡبٌ أَلَا تَتَّقُونَ

    जब उनसे शुऐब ने कहा : क्या तुम डरते नहीं हो?

    १७८

    إِنِّي لَكُمۡ رَسُولٌ أَمِينٞ

    निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।

    १७९

    فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ

    अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।

    १८०

    وَمَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

    मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।

    १८१

    ۞ أَوۡفُواْ ٱلۡكَيۡلَ وَلَا تَكُونُواْ مِنَ ٱلۡمُخۡسِرِينَ

    नाप पूरा दो और कम देने वालों में से न बनो।

    १८२

    وَزِنُواْ بِٱلۡقِسۡطَاسِ ٱلۡمُسۡتَقِيمِ

    और सीधे तराज़ू से तोलो।

    १८३

    وَلَا تَبۡخَسُواْ ٱلنَّاسَ أَشۡيَآءَهُمۡ وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ

    और लाेगों को उनका सामान कम न दो। और धरती में उपद्रव फैलाते मत फिरो।

    १८४

    وَٱتَّقُواْ ٱلَّذِي خَلَقَكُمۡ وَٱلۡجِبِلَّةَ ٱلۡأَوَّلِينَ

    और उससे डरो, जिसने तुम्हें तथा पहले लोगों को पैदा किया है।

    १८५

    قَالُوٓاْ إِنَّمَآ أَنتَ مِنَ ٱلۡمُسَحَّرِينَ

    उन्होंने कहा : निःसंदेह तू तो उन लोगों में से है जिनपर ताक़तवर जादू किया गया है।

    १८६

    وَمَآ أَنتَ إِلَّا بَشَرٞ مِّثۡلُنَا وَإِن نَّظُنُّكَ لَمِنَ ٱلۡكَٰذِبِينَ

    और तू तो बस हमारे ही जैसा एक मनुष्य[30] है और निःसंदेह हम तो तुझे झूठों में से समझते हैं।

    [30] यहाँ यह बात विचारणीय है कि सभी विगत जातियों ने अपने रसूलों को उनके मानव होने के कारण नकार दिया। और जिसने स्वीकार भी किया, तो उसने कुछ युग बीतने के पश्चात् अतिशयोक्ति करके अपने रसूलों को प्रभु अथवा प्रभु का अंश बना कर उन्हीं को पूज्य बना लिया। तथा एकेश्वरवाद को कड़ा आघात पहुँचाकर मिश्रणवाद का द्वार खोल लिया और कुपथ हो गए। वर्तमान युग में भी इसी का प्रचलन है और इसका आधार अपने पूर्वजों की रीतियों को बनाया जाता है। इस्लाम इसी कुपथ का निवारण करके एकेश्वरवाद की स्थापना के लिए आया है और वास्तव में यही सत्धर्म है। ह़दीस में है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : मूझे वैसे न बढ़ाओ जैसे ईसाइयों ने मरयम के पुत्र (ईसा) को बढ़ा दिया। निःसंदेह मैं उसका दास हूँ। अतः मुझे अल्लाह का दास और उसका रसूल कहो। (देखिए : सह़ीह़ बुख़ारी : 3445)

    १८७

    فَأَسۡقِطۡ عَلَيۡنَا كِسَفٗا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّٰدِقِينَ

    तो हम पर आसमान से कुछ टुकड़े गिरा दे, यदि तू सच्चों में से है।

    १८८

    قَالَ رَبِّيٓ أَعۡلَمُ بِمَا تَعۡمَلُونَ

    उसने कहा : मेरा पालनहार अधिक जानने वाला है जो कुछ तुम कर रहे हो।

    १८९

    فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَهُمۡ عَذَابُ يَوۡمِ ٱلظُّلَّةِۚ إِنَّهُۥ كَانَ عَذَابَ يَوۡمٍ عَظِيمٍ

    चुनाँचे उन्होंने उसे झुठला दिया। तो उन्हें छाया[31] के दिन की यातना ने पकड़ लिया। निश्चय वह एक बड़े दिन की यातना थी।

    [31] अर्थात उनकी यातना के दिन उनपर बादल छा गया। फिर आग बरसने लगी और धरती कंपित हो गई। फिर एक कड़ी ध्वनि ने उनकी जानें ले लीं। (इब्ने कसीर)

    १९०

    إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

    निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।

    १९१

    وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ

    और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।

    १९२

    وَإِنَّهُۥ لَتَنزِيلُ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

    तथा निःसंदेह, यह (क़ुरआन) निश्चय सारे संसारों के पालनहार का उतारा हुआ है।

    १९३

    نَزَلَ بِهِ ٱلرُّوحُ ٱلۡأَمِينُ

    इसे रूह़ुल-अमीन[32] (अत्यंत विश्वसनीय फ़रिश्ता) लेकर उतरा है।

    [32] रूह़ुल-अमीन से अभिप्राय आदरणीय फ़रिश्ता जिबरीलल (अलैहिस्सलाम) हैं, जो मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अल्लाह की ओर से वह़्य लेकर उतरते थे, जिसके कारण आप रसूलों की और उनकी जातियों की दशा से अवगत हुए। अतः यह आपके सत्य रसूल होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

    १९४

    عَلَىٰ قَلۡبِكَ لِتَكُونَ مِنَ ٱلۡمُنذِرِينَ

    आपके दिल पर, ताकि आप सावधान करने वालों में से हो जाएँ।

    १९५

    بِلِسَانٍ عَرَبِيّٖ مُّبِينٖ

    स्पष्ट अरबी भाषा में।

    १९६

    وَإِنَّهُۥ لَفِي زُبُرِ ٱلۡأَوَّلِينَ

    तथा निःसंदेह यह निश्चित रूप से पहले लोगों की पुस्तकों में मौजूद है।[33]

    [33] अर्थात सभी आकाशीय ग्रंथों में अंतिम नबी मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आगमन तथा आपपर पुस्तक क़ुरआन के अवतरित होने की भविष्वाणी की गई है। और सब नबियों ने इसकी शुभ-सूचना दी है।

    १९७

    أَوَلَمۡ يَكُن لَّهُمۡ ءَايَةً أَن يَعۡلَمَهُۥ عُلَمَٰٓؤُاْ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ

    क्या उनके लिए यह एक निशानी न थी है कि इसे बनी इसराईल के विद्वान[34] जानते हैं।

    [34] बनी इसराईल के विद्वान अब्दुल्लाह बिन सलाम आदि, जो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और क़ुरआन पर ईमान लाए, वे इसके सत्य होने का खुला प्रमाण हैं।

    १९८

    وَلَوۡ نَزَّلۡنَٰهُ عَلَىٰ بَعۡضِ ٱلۡأَعۡجَمِينَ

    और यदि हम इसे ग़ैर-अरब[35] लोगों में से किसी पर उतार देते।

    [35] अर्थात ऐसे व्यक्ति पर जो अरब देश और जाति के अतिरिक्त किसी अन्य जाति का हो।

    १९९

    فَقَرَأَهُۥ عَلَيۡهِم مَّا كَانُواْ بِهِۦ مُؤۡمِنِينَ

    फिर वह इसे उनके सामने पढ़ता, तो भी वे उसपर ईमान लाने वाले न होते।[36]

    [36] अर्थात अरबी भाषा में न होता, तो कहते कि यह हमारी समझ में नहीं आता। (देखिए : सूरत ह़ा, मीम, सजदा, आयत : 44)

    २००

    كَذَٰلِكَ سَلَكۡنَٰهُ فِي قُلُوبِ ٱلۡمُجۡرِمِينَ

    इसी प्रकार हमने इसे अपराधियों के हृदयों में प्रवेश कर दिया।

    २०१

    لَا يُؤۡمِنُونَ بِهِۦ حَتَّىٰ يَرَوُاْ ٱلۡعَذَابَ ٱلۡأَلِيمَ

    वे उसपर ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि वे दर्दनाक यातना देख लें।

    २०२

    فَيَأۡتِيَهُم بَغۡتَةٗ وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ

    तो वह उनपर अचानक आ पड़े और वे सोचते भी न हों।

    २०३

    فَيَقُولُواْ هَلۡ نَحۡنُ مُنظَرُونَ

    फिर वे कहें : क्या हम मोहलत दिए जाने वाले हैं

    २०४

    أَفَبِعَذَابِنَا يَسۡتَعۡجِلُونَ

    तो क्या वे हमारी यातना के लिए जल्दी मचा रहे हैं?

    २०५

    أَفَرَءَيۡتَ إِن مَّتَّعۡنَٰهُمۡ سِنِينَ

    तो क्या आपने विचार किया यदि हम इन्हें कुछ वर्षों तक लाभ दें।

    २०६

    ثُمَّ جَآءَهُم مَّا كَانُواْ يُوعَدُونَ

    फिर उनपर वह (यातना) आ जाए, जिसका उनसे वादा किया जाता था।

    २०७

    مَآ أَغۡنَىٰ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يُمَتَّعُونَ

    तो उन्हें जो लाभ दिया जाता था, वह उनके किस काम आएगा?

    २०८

    وَمَآ أَهۡلَكۡنَا مِن قَرۡيَةٍ إِلَّا لَهَا مُنذِرُونَ

    और हमने किसी बस्ती को विनष्ट नहीं किया, परंतु उसके लिए कई सावधान करने वाले थे।

    २०९

    ذِكۡرَىٰ وَمَا كُنَّا ظَٰلِمِينَ

    याद दिलाने के लिए। और हम अत्याचारी नहीं थे।

    २१०

    وَمَا تَنَزَّلَتۡ بِهِ ٱلشَّيَٰطِينُ

    तथा इस (क़ुरआन) को लेकर शैतान नहीं उतरे।

    २११

    وَمَا يَنۢبَغِي لَهُمۡ وَمَا يَسۡتَطِيعُونَ

    और न यह उनके योग्य है, और न वे ऐसा कर सकते हैं।

    २१२

    إِنَّهُمۡ عَنِ ٱلسَّمۡعِ لَمَعۡزُولُونَ

    निःसंदेह वे तो (इसके) सुनने ही से अलग[37] कर दिए गए हैं।

    [37] अर्थात इसके अवतरित होने के समय शैतान आकाश की ओर जाते हैं तो उल्का उन्हें भस्म कर देते हैं।

    २१३

    فَلَا تَدۡعُ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَ فَتَكُونَ مِنَ ٱلۡمُعَذَّبِينَ

    अतः आप अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य को न पुकारें, अन्यथा आप दंड पाने वालों में हो जाएँगे।

    २१४

    وَأَنذِرۡ عَشِيرَتَكَ ٱلۡأَقۡرَبِينَ

    और आप अपने निकटतम रिश्तेदारों को डराएँ।[38]

    [38] आदरणीय इब्ने अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि जब यह आयत उतरी तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सफ़ा पर्वत पर चढ़े। और क़ुरैश के परिवारों को पुकरा। और जब सब एकत्र हो गए, और जो स्वयं नहीं आ सका तो उसने किसी प्रतिनिधि को भेज दिया। और अबू लहब तथा क़ुरैश आ गए तो आपने फरमाया : यदि मैं तुमसे कहूँ कि उस वादी में एक सेना है जो तुम पर आक्रमण करने वाली है, तो क्या तुम मुझे सच्चा मानोगे? सबने कहा : हाँ। हमने आपको सदा ही सच्चा पाया है। आपने कहा : मैं तुम्हें आगामी कड़ी यातना से सावधान कर रहा हूँ। इसपर अबू लहब ने कहा : तेरा पूरे दिन नाश हो! क्या हमें इसी के लिए एकत्र किया है? और इसीपर सूरत लह्ब उतरी। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4770)

    २१५

    وَٱخۡفِضۡ جَنَاحَكَ لِمَنِ ٱتَّبَعَكَ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

    और ईमान वालों में से जो आपका अनुसरण करे, उसके लिए अपना बाज़ू[39] झुका दें।

    [39] अर्थात उसके साथ विनम्रता का व्यवहार करें।

    २१६

    فَإِنۡ عَصَوۡكَ فَقُلۡ إِنِّي بَرِيٓءٞ مِّمَّا تَعۡمَلُونَ

    फि यदि वे आपकी अवज्ञा करें, तो आप कह दें कि तुम जो कुछ कर रहे हो उसकी ज़िम्मेदारी से मैं बरी हूँ।

    २१७

    وَتَوَكَّلۡ عَلَى ٱلۡعَزِيزِ ٱلرَّحِيمِ

    तथा उस सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् पर भरोसा करें।

    २१८

    ٱلَّذِي يَرَىٰكَ حِينَ تَقُومُ

    जो आपको देखता है, जब आप खड़े होते हैं।

    २१९

    وَتَقَلُّبَكَ فِي ٱلسَّٰجِدِينَ

    और सजदा करने वालों में आपके फिरने को भी।[40]

    [40] अर्थात प्रत्येक समय, अकेले हों या लोगों के बीच हों।

    २२०

    إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ

    निःसंदेह वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।

    २२१

    هَلۡ أُنَبِّئُكُمۡ عَلَىٰ مَن تَنَزَّلُ ٱلشَّيَٰطِينُ

    क्या मैं आपको बताऊँ कि शैतान किस पर उतरते हैं?

    २२२

    تَنَزَّلُ عَلَىٰ كُلِّ أَفَّاكٍ أَثِيمٖ

    वे हर बड़े झूठे और बड़े पापी[41] पर उतरते हैं।

    [41] ह़दीस में है कि फ़रिश्ते बादल में उतरते हैं, और आकाश में होने वाले निर्णय की बात करते हैं, जिसे शैतान चोरी से सुन लेते हैं। और ज्योतिषियों को पहुँचा देते हैं। फिर वह उसमें सौ झूठ मिलाते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारी : 3210)

    २२३

    يُلۡقُونَ ٱلسَّمۡعَ وَأَكۡثَرُهُمۡ كَٰذِبُونَ

    वे सुनी हुई बात को (काहिनों तक) पहुँचा देते हैं, और उनमें से अधिकतर झूठे हैं।

    २२४

    وَٱلشُّعَرَآءُ يَتَّبِعُهُمُ ٱلۡغَاوُۥنَ

    और कवि लोग, उनके पीछे भटके हुए लोग ही चलते हैं।

    २२५

    أَلَمۡ تَرَ أَنَّهُمۡ فِي كُلِّ وَادٖ يَهِيمُونَ

    क्या आपने नहीं देखा कि वे प्रत्येक वादी में भटकते फिरते[42] हैं।

    [42] अर्थात कल्पना की उड़ान में रहते हैं।

    २२६

    وَأَنَّهُمۡ يَقُولُونَ مَا لَا يَفۡعَلُونَ

    और यह कि निःसंदेह ऐसी बात कहते हैं, जो करते नहीं।

    २२७

    إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ وَذَكَرُواْ ٱللَّهَ كَثِيرٗا وَٱنتَصَرُواْ مِنۢ بَعۡدِ مَا ظُلِمُواْۗ وَسَيَعۡلَمُ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓاْ أَيَّ مُنقَلَبٖ يَنقَلِبُونَ

    सिवाय उन (कवियों) के, जो[43] ईमान लाए, और अच्छे कर्म किए और अल्लाह को बहुत याद किया तथा बदला लिया, इसके बाद कि उनके ऊपर ज़ुल्म किया गया। तथा वे लोग, जिन्होंने अत्याचार किया, शीघ्र ही जान लेंगे कि वे किस जगह लौटकर जाएँगे।

    [43] इनसे अभिप्रेत ह़स्सान बिन साबित आदि कवि हैं, जो क़ुरैश के कवियों की भर्त्सना किया करते थे। (देखिए : सह़ीह़ बुख़ारी : 4124)

    Ash-Shuara

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